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ट्रम्प कॉकटेल : लखनऊ में दो कोरोना मरीजों को दिया मोनोक्लोनल एंटीबॉडी ट्रीटमेंट, दोनों में सुधार

Mon, 31 May 2021 01:51 AM IST
लखनऊ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

  • जिन मरीजों को ट्रम्प कॉकटेल दिया गया उनकी हालत में सुधार का दावा किया जा रहा है
  • डॉक्टरों ने बताया कि संक्रमण के दस दिन के अंदर ही दिया जाना चाहिए यह ट्रीटमेंट
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मेदांता के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. राकेश कपूर - फोटो : ANI
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विस्तार
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राजधानी में भी कोरोना मरीजों को ट्रम्प कॉकटेल दिया गया है। दो निजी चिकित्सा संस्थानों में एक-एक मरीज को रविवार को यह कॉकटेल दिया गया। इन संस्थानों का दावा है कि जिन मरीजों को ट्रम्प कॉकटेल दिया गया उनकी हालत में सुधार हो रहा है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प जब कोरोना संक्रमित हुए थे तब उन्हें मोनोक्लोनल एंटीबॉडी ट्रीटमेंट दिया गया था। इसी के साथ यह पद्धति ट्रम्प कॉकटेल के रूप में चर्चा में आई।

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अपोलो मेडिक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल और मेदांता हॉस्पिटल में इस ट्रीटमेंट की शुरुआत हुई है। मेदांता हॉस्पिटल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. राकेश कपूर ने बताया कि राजधानी निवासी मरीज में रविवार सुबह कोविड -19 की मोनोक्लोनल एंटीबाडी ट्रीटमेंट शुरू किया गया।डॉ. रुचिता शर्मा ने इस मरीज को पहला कॉकटेल ट्रीटमेंट दिया। मोनोक्लोनल एंटोबॉडी ट्रीटमेंट लेने के बाद मरीज स्वस्थ है।

इसी तरह अपोलो मेडिक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में भी मरीज को यह ट्रीटमेंट दिया गया। दोनों संस्थानों ने इलाज का खर्च उजागर नहीं किया है लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि अभी यह ट्रीटमेंट सामान्य लोगों की पहुंच से बाहर है।
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क्या है ट्रीटमेंट की खासियत
डॉ. राकेश कपूर ने बताया कि इस ट्रीटमेंट में रिजेनेरॉन दवा दी गई। विभिन्न शोध में ये पता चला है कि इस दवाई के प्रयोग से 80 फीसदी लोगों को हॉस्पिटल में कम दिन रहना पड़ा और मृत्यु दर कम होती है।

ट्रंप कॉकटेल नाम से प्रचलित
अपोलो मेडिक्स सुपर स्पेशयलिटी हॉस्पिटल के सीईओ व मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. मयंक सोमानी ने बताया कि पिछले वर्ष कोविड से संक्रमित होने के बाद डोनाल्ड ट्रंप को यह कॉकटेल एंटीबॉडी ट्रीटमेंट दिया गया था तब से इसे ट्रम्प कॉकटेल औए नाम से भी जाना जाता है। यह इलाज अभी तक पश्चिमी देशों में उपलब्ध था। डॉ. सोमानी ने बताया कि यह एंटीबॉडी वायरस के स्पाइक प्रोटींस के बीच में काम करती हैं, जिससे वायरस शरीर में रेप्लिकेट नहीं कर पाता। इससे संक्रमण के खिलाफ मरीज को अपने शरीर में प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है।

संक्रमण के दस दिन के अंदर ही दिया जाना चाहिए यह ट्रीटमेंट
यह पद्धति माइल्ड या मॉडरेट कोविड इंफेक्शन के लिए ही कारगर है, जिनमें ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं होती है। जैसे टेस्ट रिजल्ट पॉजिटिव आए, जितना जल्दी हो सके मरीज को 10 दिन के भीतर ही मोनोक्लोनल एंटीबॉडी ट्रीटमेंट दे दिया जाना चाहिए। इसमें इंट्रावीनस पद्धति से मरीज के शरीर में इंजेक्ट की जाती है, जिसमें एक घंटे का समय लगता है। इसके बाद एक घंटे तक मरीज को मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रखा जा सकता है, जिसके बाद मरीज घर जा सकता है।

यह इलाज इनके लिए कारगर है
- जिनका बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 35 के बराबर या उससे अधिक है।
-जो क्रॉनक किडनी रोग, मधुमेह या प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करने वाली बीमारी से पीड़ित हैं।
- 65 पार आयु वाले मरीज या 55 से अधिक उम्र के ऐसे मरीज जो हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज या किसी अन्य पुरानी सांस की बीमारी से पीड़ित हैं।

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