काश! बेटे की जिद न करता! लगातार तीन बेटियां हुईं तो मान लिया कि ऊपर वाला बेटा नहीं देना चाहता है। चौथी बेटी हुई तो नसबंदी कराने की सोची। बड़ों की सलाह पर मुकर गया।
अब भगवान ने दो बेटों के साथ एक बेटी भी दे दी। मैं मजदूर इन्हें कैसे पालूंगा। सात बच्चों का बोझ कैसे उठाउंगा। यह कहना है कि जच्चा बच्चा अस्पताल में एक साथ हुए तीन बच्चों के पिता कानपुर देहात के रूरा सरगांव बुजुर्ग निवासी दिनेश चंद्र का।
यहां भर्ती उनकी पत्नी शैल कुमारी ने शुक्रवार को तीन बच्चों को जन्म दिया। जिसमें दो बेटे और एक बेटी है। दंपति के पहले से ही चार बेटियां पारुल (10), पायल (8), अर्चना (5) और पलक (3) हैं।