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Lucknow News: कड़ी हो गई भी भोजन की नली, बिना चीरा दिलाई राहत

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केजीएमयू में अचेलेसिया कार्डिया बीमारी का केजीएमयू में बिना चीरा लगाए इलाज
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किंग जाॅर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के डाॅक्टरों ने अचालेसिया कार्डिया जैसी दुर्लभ बीमारी का बिना चीरा लगाए सफल इलाज किया है। अचालेसिया कार्डिया की बीमारी में खाने की नली का निचला हिस्सा बेहद कड़ा हो जाता है। इस वजह से भोजन खाने की नली से पेट तक जाने में समस्या होती है।
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गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुमित रूंगटा ने बताया कि अचालेसिया कार्डिया के इलाज में अन्य डाॅक्टरों को दक्ष बनाने के लिए विभाग में विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें इंटरवेंशनल एंडोस्कोपी एआईजी हैदराबाद के निदेशक डॉ. मोहन रामचंदानी और एम्स नई दिल्ली के डॉ. दीपक गुंजन ने यह प्रक्रिया करके दिखाई। इस बीमारी का इलाज -पर ओरल इंडोस्कोपिक मायोटाॅमी (पोएम), से मिनिमली इनवेसिव एंडोस्कोपिक प्रक्रिया से किया जाता है। इसमें मुंह के रास्ते एंडोस्कोप को खाने की नली में प्रवेश कराया जाता है और वहां एक सूक्ष्म चीरा देकर मांसपेशियों को सटीक रूप से अलग किया जाता है। ऐसा होने पर भोजन की नली का तनाव कम हो जाता है। इससे मरीज को राहत मिल जाती है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि मरीज को जल्दी राहत मिलती है और अधिकतर मामलों में वे एक से दो दिनों के भीतर सामान्य गतिविधियों में लौट सकते हैं। कार्यशाला के दाैरान नाै मरीजों का इलाज किया गया। इसमें विभागाध्यक्ष डॉ. सुमित रूंगटा के साथ-साथ डॉ. अनन्य गुप्ता, डॉ. मयंक राजपुर, डॉ. प्रीतम दास, डॉ. सयान मलाकार, डॉ. श्रीकांत कोथालकर और डीएम कोर्स के अन्य छात्र शामिल रहे।

एक लाख की आबादी पर एक को खतरा
अचालेसिया कार्डिया जैसी बीमारी का भारत में हर एक लाख की आबादी पर 0.6 से 1 का औसत है। यह एक दुर्लभ रोग है। इसमें भोजन की नली बेहद सख्त हो जाती है और भोजन को पेट में जाने से रोकती है।
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ये होते हैं लक्षण-
भोजन निगलने में कठिनाई, सीने में भारीपन, छाती में दर्द, रात में भोजन का वापस गले में आना और समय के साथ वजन में कमी।

केजीएमयू में अचेलेसिया कार्डिया बीमारी का केजीएमयू में बिना चीरा लगाए इलाज

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