ब्रह्मांड की सैर अब और रोमांचक होने वाली है। जुरासिक युग से लेकर हजारों साल आगे तक का जबरदस्त अनुभव मिलेगा। इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला दो साल बाद नए रूप और अत्याधुनिक तकनीक के साथ दर्शकों के लिए फिर से खुल गई है। आगे पढ़ें और जानें स्थान और टिकट के दाम...
अगर आप अंतरिक्ष, ग्रह-नक्षत्र और ब्रह्मांड के रहस्यों को करीब से देखना चाहते हैं, तो अब इसका और भी शानदार अनुभव मिलने जा रहा है। प्रदेश की सबसे अनूठी नक्षत्रशाला राजधानी लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला दो साल बाद नए रूप और अत्याधुनिक तकनीक के साथ मंगलवार से दर्शकों के लिए फिर से खुल रही है। यहां दर्शक थ्रीडी इफेक्ट्स और टाइम मशीन जैसे अनुभवों के जरिये लाखों साल पीछे जुरासिक युग तक और हजारों साल आगे भविष्य तक की यात्रा कर सकेंगे।
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नक्षत्रशाला के नवीनीकरण पर अब तक लगभग 42 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। उत्तर प्रदेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अनिल कुमार इसका लोकार्पण करेंगे। राज्यमंत्री अजीत सिंह पाल और प्रमुख सचिव पंधारी यादव भी मौजूद रहेंगे। इस मौके पर अटल आवासीय विद्यालय मोहनलालगंज के 110 विद्यार्थी शो देखने के लिए पहुंचेंगे।
इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला
- फोटो : अमर उजाला
टाइम मशीन जैसा मिलेगा अनुभव
नया तारामंडल दर्शकों को समय में पीछे और आगे ले जाएगा। लाखों साल पुराने जुरासिक युग के डायनासोरों की दुनिया, तारों की टूटन, उल्कापिंडों की बौछार, ग्रहों की चाल और सूर्य-चंद्र ग्रहण, हजारों साल आगे-पीछे जाकर खगोलीय पिंडों की वास्तविक स्थिति देख सकेंगे।आभासी और वास्तविक दुनिया का फर्क मिटाते हुए दर्शक खुद को अंतरिक्ष यात्री की तरह महसूस करेंगे। विज्ञान अधिकारी डॉ. सुमित कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि नक्षत्रशाला में अब न केवल एस्ट्रोनाॅमी और स्पेस साइंस, बल्कि भौतिकी, जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, कला आदि से संबंधित चीजों के भी तह में जा सकेंगे।
इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला
- फोटो : अमर उजाला
ये तकनीक बना रहे सबसे आधुनिक
कुल 216 सीटों की क्षमता।
8K डिजिटल टूडी और थ्रीडी तकनीक से लैस नया सिस्टम।
अमेरिका की इवांस एंड सदरलैंड कंप्यूटर्स की मदद से 12 ग्राफिक प्रॉसेसिंग यूनिट, आधुनिक साउंड सिस्टम और क्रिस्टी मिराज थ्रीडी प्रोजेक्टर।
नया नैनोसीम डोम और परफोरेटेड एल्युमिनियम का विशाल पर्दा, जिस पर सब कुछ बिल्कुल असली जैसा दिखता है।
नए सॉफ्टवेयर से रात का आकाश दस हजार साल आगे और दस हजार साल पीछे तक दिखाया जा सकता है।
इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला
- फोटो : अमर उजाला
पुराने तारामंडल से नए की यात्रा
2003 से संचालित नक्षत्रशाला अब तक लाखों दर्शकों को खगोल विज्ञान से जोड़ चुकी है।
पहले जापान की गोटो कंपनी का ऑप्टोमैकेनिकल प्रोजेक्टर था, जिसकी जगह अब डिजीस्टार-7 संस्करण लगाया गया है। विश्वभर में 700 से अधिक नक्षत्रशालाएं इस तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं। भारत में पटना, जयपुर, हैदराबाद, अहमदाबाद, मुंबई, नासिक, मंगलुरु में यह प्रणाली कार्यरत है।
पहले एलुमिनियम फाइबर का डोम था, जिसमें शो के दाैरान जोड़ दिखाई देते थे। अब नया 15 मीटर व्यास का सीमलेस नैनोसीम डोम अब शो को और जीवंत बनाएगा।
प्लैनेटोरियम डोमकास्टिंग की सुविधा से यहां से दुनिया के अन्य तारामंडलों में लाइव शो प्रसारित हो सकेंगे।
नासा और ईसा (यूरोपियन स्पेस एजेंसी) के जियोस्पेशियल डेटा का भी रियल-टाइम प्रदर्शन संभव होगा।