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कर्मचारियों और शिक्षकों का वाहन भत्ता डेढ़ गुना बढ़ा

Mon, 03 Nov 2014 09:56 PM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
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प्रदेश कैबिनेट ने राजकीय विभागों के नि:शक्त कर्मियों तथा शारीरिक रूप से अक्षम बच्चों के राजकीय विद्यालय, मूक तथा बधिर राजकीय विद्यालय व राजकीय दृष्टिबाधित विद्यालयों के शारीरिक रूप से अक्षम शिक्षकों के वाहन भत्ते डेढ़ गुना बढ़ा दिए गए हैं।
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बढ़े हुए भत्ते नवंबर 2014 से दिए जाएंगे। इसके अलावा विधानसभा व विधान परिषद सचिवालय के संपादकों के वेतन में बढ़ोतरी के लिए ग्रेड पे 4600 से 5400 करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

नि:शक्त कर्मियों का इस तरह से बढ़ा वाहन भत्ता
- 1800 ग्रेड पे तक वाले कर्मी 300 रुपये प्रतिमाह के स्थान पर 450 रुपये पाएंगे।
- 1900 से 2800 रुपये ग्रेड पे वाले कर्मी 400 रुपये प्रतिमाह के स्थान पर 600 रुपये पाएंगे।
- 4200 व इससे अधिक ग्रेड पे वाले कर्मी 500 रुपये प्रतिमाह के स्थान पर अब 750 रुपये पाएंगे।

नि:शक्त शिक्षक-शिक्षिकाओं के वाहन भत्ते इस तरह बढ़े
अध्यापक/अध्यापिकाएं : 400 रुपये केस्थान पर 600 रुपये प्रतिमाह
प्रधानाध्यापक/प्रधानाध्यापिकाएं : 500 रुपये के स्थान पर 750 रुपये प्रतिमाह

एक्सप्रेस-वे : अथॉरिटी इंजीनियर का होगा चयन

प्रदेश सरकार ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे परियोजना को तय टाइमलाइन में आगे बढ़ाने व बेहतर निगरानी के लिए परियोजना के पांचों पैकेजों के लिए एक ही अथॉरिटी इंजीनियर के चयन का निर्णय किया है। इससे सभी पैकेजों में एकरूपता रहेगी।

प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि अथॉरिटी इंजीनियर पर आने वाले खर्च का वहन शासन की ओर से देय सुपरविजन चार्ज से किया जाएगा। बताते चलें, निर्माणकर्ताओं के चयन के लिए जारी आरएफ पी में अथॉरिटी इंजीनियर के चयन का प्रावधान किया गया था।

अथॉरिटी इंजीनियर का काम परियोजना के पांचों पैकेजों के डिजाइन की स्वीकृति, कराए जाने वाले कार्य व उसके बाद पांच वर्ष तक मेंटेनेंस के कार्यों कासुपरविजन करना है। क्वालिटी कंट्रोल की जिम्मेदारी भी उसकी होगी।

बंद नौ कताई मिलों को चलाने का फैसला

प्रदेश कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश सहकारी कताई मिल संघ, कानपुर की बंद नौ कताई मिलों को फिर से चलाने का फैसला किया है। सरकार ने तय किया है कि 10 वर्ष के लिए यूजर चार्ज लेकर निजी क्षेत्र को मिलें चलाने की अनुमति दी जाएगी।

कैबिनेट ने जिन नौ मिलों को चलाने की अनुमति दी है, उनमें मगहर, नगीना, बुलंदशहर, बहादुरगंज, कम्पिल, अमरोहा, बहेड़ी, फतेहपुर व मऊआइमा की मिलें शामिल हैं। बैठक में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को कंसल्टेंट नियुक्त कर प्री-बिड कॉन्फ्रेंस की प्रक्रिया भी तय कर दी गई। इसमें संभावित मिल संचालकों से बात कर बिड डॉक्यूमेंट तैयार करने को कहा गया है।

कैबिनेट ने इन सभी मिलों का फिर से भौतिक निरीक्षण कराने का फैसला किया है। इससे पता लगाया जाएगा कि मिल संचालन के लिए जरूरी जमीन के अलावा कितनी अतिरिक्त जमीन बचती है। इस अतिरिक्त जमीन को बेचकर ज्यादा से ज्यादा रकम जुटाने की बात कही गई है।

मिलों की बकाया अदायगी के लिए अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त की अध्यक्षता में सभी संबंधित बैंकों की बैठक होगी। इसमें ऋणों की अदायगी के संबंध में वनटाइम सेटेलमेंट की योजना बनाई जाएगी। शासकीय ऋण की राशि को अंश पूंजी में बदला जाएगा।
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आगरा व वाराणसी में बनेंगे पुलिस कंट्रोल रूम

पुलिस आधुनिकीकरण योजना के तहत अब आगरा व वाराणसी में अत्याधुनिक पुलिस कंट्रोल रूम बनाए जाएंगे। साथ ही सूबे के 20 अन्य जिलों में भी ऐसे ही कंट्रोल रूमों की स्थापना की जाएगी। इस पर सोमवार को मंत्रिपरिषद की बैठक में सहमति दे दी गई।

आगरा और वाराणसी में स्थापित होने वाले कंट्रोल रूम में जीआईएस/जीपीएस तथा व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम युक्त सुविधा होगी। सीसीटीवी, सर्विलांस सिस्टम की स्थापना भी की जाएगी। आगरा के 100 तथा वाराणसी के 81 चौराहों/तिराहों पर सीसीटीवी कैमरे/सर्विलांस सिस्टम लगाए जाएंगे।

इनमें अत्याधुनिक पुलिस कंट्रोल रूम के लिए जिन कार्यों के लिए प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृतियां होनी हैं, उनके संबंध में विस्तृत औपचारिक आदेश सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन से अलग से जारी किए जाएंगे।

रायबरेली, फैजाबाद समेत 20 जिलों में बनेंगे कंट्रोल रूम
मेरठ, गौतमबुद्धनगर, बुलंदशहर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बरेली, मुरादाबाद, रामपुर, इटावा, झांसी, मथुरा, अलीगढ़, चित्रकूट, रायबरेली, फैजाबाद, मिर्जापुर, आजमगढ़, गोरखपुर, बस्ती तथा गोंडा से प्राप्त होने वाले प्रस्तावों के क्रियान्वयन को चरणबद्ध तरीके से वित्तीय एवं प्रशासनिक अनुमोदन प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया गया है।
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