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'मान ली होती बात, तो जिंदा होता मेरा लल्ला'

Tue, 13 Jan 2015 12:44 PM IST
मनीष कुमार सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
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मलिहाबाद में जहरीली शराब ने कई घरों की खुशियां खाक में मिला दीं। जहरीली शराब ने एक साल पहले छंगा के साथ सात फेरों के बंधन में बंधी रेनू की मांग सूनी कर दी। यहां ट्रॉमा सेंटर के वेंटिलेटर यूनिट में तैनात डॉक्टरों ने जब छंगा (25) का नाम पुकारा तो उसके परिवारीजन ऐसे व्याकुल होकर दौड़ पड़े जैसे उन्हें उनका लल्ला पुकार रहा हो।
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लेकिन उनकी खुशियां पल में खाक हो गई, जब डॉक्टरों ने बताया कि वे उनके लल्ला को बचा नहीं सके। इससे वहां चीख-पुकार मच कई। छंगा के बुजुर्ग पिता रेवती की आंखें तो बहुत पहले से डबडबाई थीं लेकिन जब बेटे की आंखें बंद हुई तो आंखों से अश्रुधारा निकली।

बुजुर्ग पिता बस यही कहकर फफक रहे थे कि अगर छंगा ने उनकी बात मान ली होती और शराब पीना छोड़ दिया होता तो उनका लल्ला आज जिंदा होता। छंगा के शव के पास खड़ी उसकी भाभी नीलम बार-बार उसके नब्ज को इस आस में टटोल रही थी कि वह बोले अरे भाभी कुछ खाने को दे दे।
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फोन बज रहा था, मगर उठाने की हिम्‍मत नहीं हुई

कुछ ऐसा ही हृदय विदारक दृश्य बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी में रहा। खड़ता के राजू (32) की सांस बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी में सोमवार को करीब ग्यारह बजे थमी तो हाहाकार मच गया। बहनोई अयोध्या कुछ समझ पाते इससे पहले ही वो पूरी तरह टूट गए।

घर से फोन की घंटिया लगातार बज रही थी लेकिन कोई ये बताने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था कि अब उनका राजू नहीं रहा। अस्पताल के कर्मचारियों ने शव को मॉच्यूरी पहुंचा दिया। उधर, खड़ता के सजीवन लाल (58) पर जहरीली शराब ने अब तेजी से अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था।

80 वर्षीय पिता मंगलू बेटे की जिदंगी के लिए आंख बंद कर दुआ कर रहे थे कि अचानक सजीवन बेड पर गिर पड़ा और किसी तरह कह सका कि उसे कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है। मौके पर पहुंचे डॉ. मनोज अग्रवाल ने जांच करने के बाद तत्काल ट्रॉमा सेंटर के लिए रेफर कर दिया, जहां देर रात उसने दम तोड़ दिया।
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रुक नहीं रही सिसकियां

वहीं ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कमल सिंह की हालत में काफी सुधार हो चुका है। उसे अब समझ आ गया है कि दर्द कम करने के लिए नशे की आदत उनके लिए कैसे जानलेवा बन जाती।

ट्रॉमा सेंटर की इमरजेंसी, वेंटिलेटर यूनिट, आपदा प्रबंधन वार्ड में सिसकियां रुक नहीं रही थीं। तो बाहर का माहौल और गमगीन करने था। जहरीली शराब से बेसुध लोगों की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ तो उनके अपने के एक-दूसरे के कंधों पर सिर रखकर रोते नजर आए।

वहीं कुछ लोग अपनों की सलामती की दुआ के लिए ट्रॉमा के मंदिर में पूजा-अर्चना करते रहे, लेकिन उनके आंसू रुक नहीं रहे थे। ट्रॉमा में इलाज के लिए आने वाले मरीजों के तीमारदारों की आंखें भी यहां का दृश्य देखकर भर जा रही थीं।
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