प्रदेश में हाल ही में लागू हुई रोड सेफ्टी एक्ट के तहत अब स्वास्थ्य विभाग ट्रॉमा केयर सिस्टम दुरुस्त कर रहा है। प्रदेश में चार स्तर के ट्रॉमा केयर सेंटर के जरिये सड़क दुर्घटना के शिकार लोगों का इलाज किया जाएगा।
इसके तहत प्रत्येक 100 किलोमीटर की दूरी पर इमरजेंसी स्टेबिलाइजेशन सेंटर बनेंगे। प्रदेश में हर साल सड़क हादसे में लगभग 36 हजार लोगों की मृत्यु होती है। इसी को देखते हुए सरकार ने रोड सेफ्टी नीति लागू की है।
इसके तहत स्वास्थ्य विभाग ने भी काम करना शुरू कर दिया है। प्रमुख सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग अरविंद कुमार ने बताया कि सड़क हादसे में घायलों के इलाज के लिए लेवल-1 से लेवल-4 तक के ट्रॉमा केयर सिस्टम तैयार किया गया है।
लेवल-1 के ट्रॉमा केयर सेंटर सबसे उच्चीकृत सेंटर है। इसमें सबसे गंभीरतम मरीजों के इलाज किए जाएंगे। इसमें सभी प्रकार के सुपर स्पेशलिस्ट विभाग व डॉक्टर मौजूद रहेंगे। सभी प्रमुख शहरों में इस तरह के ट्रॉमा केयर सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं।
इसके बाद 200 से 300 किलोमीटर की दूरी पर लेवल-2 के ट्रॉमा केयर सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इसमें इमरजेंसी फिजिशियन, सर्जन, हड्डी रोग विशेषज्ञ, एनेस्थिसिया डॉक्टर मौजूद रहेंगे।