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UP News: ऑटो अप्रूवल व्यवस्था के विरोध में परिवहनकर्मियों ने फूंका बिगुल, सुनवाई नहीं होने पर जाएंगे कोर्ट

Sun, 19 Jul 2026 08:35 PM IST
Bhupendra Singh नीरज 'अम्बुज', अमर उजाला, लखनऊ

सार

यूपी में ऑटो अप्रूवल व्यवस्था के विरोध में परिवहनकर्मियों ने बिगुल फूंका। सुनवाई नहीं होने पर कोर्ट जाने की चेतावनी दी। 1250 अधिकारियों-कर्मचारियों ने मोटरयान अधिनियम का पालन करने को कहा। राजधानी के ट्रांसपोर्ट नगर आरटीओ में कर्मचारियों ने बैठक करके महत्वपूर्ण निर्णय लिए। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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ऑटो अप्रूवल व्यवस्था के विरोध में परिवहनकर्मियों की बैठक। - फोटो : विभाग।
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विस्तार
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आरटीओ में वाहनों के ट्रांसफर, पंजीकरण आदि सेवाओं की ऑटो अप्रूवल (स्वत: स्वीकृति) व्यवस्था लागू होने के विरोध में रविवार को लखनऊ सहित प्रदेशभर के अधिकारियों व कर्मचारियों ने बिगुल फूंक दिया। अधिकारियों ने जहां मोटर व्हीकल एक्ट के पालन की मांग उठाई है। वहीं कर्मचारियों ने ट्रांसपोर्ट नगर आरटीओ में बैठक कर सत्यापन व अप्रूवल का अधिकार विभाग के पास ही रहने देने की मांग उठाई। मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन व कोर्ट जाने की चेतावनी भी दी।
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वाहनों के ट्रांसफर, पंजीकरण सहित सभी कार्यों के लिए अभी तक आवेदकों को आरटीओ-एआरटीओ कार्यालय जाना पड़ता है। शासन की ओर से इस व्यवस्था को बदला जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत आवेदकों को आरटीओ जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ऑटो अप्रूवल मोड के तहत उनके कार्य हो जाएंगे। इस व्यवस्था पर शासन की ओर से सोमवार को विचार-विमर्श के लिए बैठक भी बुलाई गई है। 

 

प्रदेशभर के पदाधिकारियों व कर्मचारियों ने हिस्सा लिया

वहीं दूसरी ओर रविवार को परिवहन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने ऑटो अप्रूवल व्यवस्था के विरोध में मोर्चा खोल दिया। ट्रांसपोर्टनगर आरटीओ में उत्तर प्रदेश संभागीय परिवहन कर्मचारी संघ की प्रांतीय वार्षिक आम सभा में इसके खिलाफ मोर्चा खोला गया। बैठक में प्रदेशभर से आए पदाधिकारियों व कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। 

अध्यक्ष संजय सिंह ने कहाकि शासन स्तर पर परिवहन विभाग की सभी सेवाओं को ''ऑटो अप्रूवल'' मोड पर डालने की तैयारी का हरस्तर पर विरोध किया जाएगा। मोटर वाहन अधिनियम के तहत ऑनलाइन स्तर पर सत्यापन और स्वीकृति(अप्रूवल) का अधिकार आरटीओ कार्यालय के पास ही रहना चाहिए। यदि इस व्यवस्था को समाप्त किया जाता है तो भविष्य में न्यायालयों में विवेचना अधिकारियों को सूचनाएं देने के लिए डीलर्स को ही अधिकृत किया जाए। 
 

परिवहनकर्मियों की बैठक। - फोटो : विभाग।

कर्मचारी आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य हों

प्रांतीय महामंत्री आशुतोष तिवारी ने कहाकि जायज मांगों पर नियमानुसार त्वरित विचार नहीं किया गया तो कर्मचारी आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होंगे। उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग स्टेनोग्राफर संघ के अध्यक्ष अरुण यादव ने नई व्यवस्था पर पुन: विचार करने का आग्रह शासन से किया है। बैठक में संघ की लखनऊ ईकाई के अध्यक्ष किशन चंद, प्रदेश सचिव पवन त्रिपाठी, महामंत्री सरफराज सहित श्रवण कुमार, अनुज यादव, केके दुबे आदि उपस्थित रहे।  

रिक्त पदों को भरने की भी उठाई मांग

बैठक के दैारान कर्मचारियों ने लंबित एसीपी का मामला भी उठाया। वक्ताओं ने कहाकि क्षेत्रीय कार्यालयों में विगत कई वर्षों से कार्यरत लिपिक संवर्ग के कर्मचारियों के एसीपी(एश्योर्ड करियर प्रमोशन) के प्रकरण निस्तारित किए जाएं। इसके अलावा यात्री कर एवं माल कर अधिकारी के रिक्त पदों को प्रोन्नति के माध्यम से भरा जाए। लिपिक संवर्ग का पुनर्गठन हो। तीन वर्षों से अधिक समय से लंबित लिपिक संवर्ग के पुनर्गठन की कार्रवाई पूर्ण न होने पर कर्मचारियों ने गहरा असंतोष व्यक्त किया।
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बैठक में शामिल परिवहन विभाग के कर्मी। - फोटो : विभाग।

अधिकारी बोले: फेसलेस नहीं, आटो अप्रवूल से दिक्कतें

उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग की जनसेवाओं को पूरी तरह ऑनलाइन और आटो अप्रूवल करने की नई प्रक्रिया का उप्र ट्रांसपोर्ट ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन, उप्र परिवहन विभाग संभागीय निरीक्षक(प्राविधिक) सेवा संघ और उप्र संभागीय परिवहन कर्मचारी संघ ने भी विरोध किया। 

अधिकारियों ने कहाकि फेसलेस से दिक्कतें नहीं हैं, बल्कि आटो अप्रवूल व्यवस्था लागू होने से समस्याएं बढ़ेंगी। एसोसिएशन महासचिव मनोज कुमार वर्मा और अध्यक्ष प्रमोद कुमार सिंह ने कहाकि नई व्यवस्था लागू करने से पहले भविष्य की कठिनाइयों, राजस्व हानि और कानूनी पहलुओं पर पर्याप्त विचार-विमर्श होना चाहिए।

इस पर है आपत्ति, सुधार की मांग

  • मोटर व्हीकल एक्ट में आटो अप्रूवल की व्यवस्था का कहीं भी उल्लेख नहीं है। ऐसे में एक्ट में संशोधन किए बगैर आटो अप्रूवल व्यवस्था क्यों और कैसे लागू की जा सकती है। इसके लिए पहले एक्ट में संशोधन होना चाहिए।
  • वाहनों के ट्रांसफर आदि के आटो अप्रूवल होने के बाद यदि गड़बड़ी या फ्राड उजागर होता है तो जिम्मेदारी किसकी होगी। आवेदक के कोर्ट जाने पर पैरवी के लिए कौन जाएगा?
  • जब डीलर स्तर पर ही आवेदनों का अप्रूवल होगा तो उसे ही अप्रूविंग अथाॅरिटी क्यों नहीं बना दिया जा रहा है। लाइसेंसिंग अथाॅरिटी के रूप में अधिकारियों को हटाना चाहिए। इससे अफसरों को अनावश्यक पचड़ों में नहीं पड़ना होगा।
  • इन्वेस्टिगेशन के अधिकार अफसरों के हैं। ऐसे में आटो अप्रूव्ड व्यवस्था लागू कर उनके अधिकारों को नहीं छीना जाना चाहिए। ऐसे ही कर्मचारियों के अधिकारों का हनन भी गलत है।
  • प्रदेशभर में 2000 से अधिक अधिकारी व 250 कर्मचारी हैं। आटो अप्रूव्ड व्यवस्था लागू होने के बाद उनकी क्या भूमिका व कार्य रह जाएंगे, इसे स्पष्ट किया जाना चाहिए। 
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