परिवहनकर्मियों की बैठक।
- फोटो : विभाग।
बैठक में शामिल परिवहन विभाग के कर्मी।
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अधिकारी बोले: फेसलेस नहीं, आटो अप्रवूल से दिक्कतें
उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग की जनसेवाओं को पूरी तरह ऑनलाइन और आटो अप्रूवल करने की नई प्रक्रिया का उप्र ट्रांसपोर्ट ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन, उप्र परिवहन विभाग संभागीय निरीक्षक(प्राविधिक) सेवा संघ और उप्र संभागीय परिवहन कर्मचारी संघ ने भी विरोध किया।
अधिकारियों ने कहाकि फेसलेस से दिक्कतें नहीं हैं, बल्कि आटो अप्रवूल व्यवस्था लागू होने से समस्याएं बढ़ेंगी। एसोसिएशन महासचिव मनोज कुमार वर्मा और अध्यक्ष प्रमोद कुमार सिंह ने कहाकि नई व्यवस्था लागू करने से पहले भविष्य की कठिनाइयों, राजस्व हानि और कानूनी पहलुओं पर पर्याप्त विचार-विमर्श होना चाहिए।
इस पर है आपत्ति, सुधार की मांग
- मोटर व्हीकल एक्ट में आटो अप्रूवल की व्यवस्था का कहीं भी उल्लेख नहीं है। ऐसे में एक्ट में संशोधन किए बगैर आटो अप्रूवल व्यवस्था क्यों और कैसे लागू की जा सकती है। इसके लिए पहले एक्ट में संशोधन होना चाहिए।
- वाहनों के ट्रांसफर आदि के आटो अप्रूवल होने के बाद यदि गड़बड़ी या फ्राड उजागर होता है तो जिम्मेदारी किसकी होगी। आवेदक के कोर्ट जाने पर पैरवी के लिए कौन जाएगा?
- जब डीलर स्तर पर ही आवेदनों का अप्रूवल होगा तो उसे ही अप्रूविंग अथाॅरिटी क्यों नहीं बना दिया जा रहा है। लाइसेंसिंग अथाॅरिटी के रूप में अधिकारियों को हटाना चाहिए। इससे अफसरों को अनावश्यक पचड़ों में नहीं पड़ना होगा।
- इन्वेस्टिगेशन के अधिकार अफसरों के हैं। ऐसे में आटो अप्रूव्ड व्यवस्था लागू कर उनके अधिकारों को नहीं छीना जाना चाहिए। ऐसे ही कर्मचारियों के अधिकारों का हनन भी गलत है।
- प्रदेशभर में 2000 से अधिक अधिकारी व 250 कर्मचारी हैं। आटो अप्रूव्ड व्यवस्था लागू होने के बाद उनकी क्या भूमिका व कार्य रह जाएंगे, इसे स्पष्ट किया जाना चाहिए।