रात तक चलती रही खुदाई।
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जांच में रिपोर्ट में इसका भी स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि ढही बिल्डिंग की स्ट्रक्चरल डिजाइन की रिपोर्ट न मिलने के कारण यह तय करना पाना संभव नहीं है कि बिल्डिंग किस कारण ढही क्योंकि करीब 12-13 साल पहले बनी बिल्डिंग निर्माण कार्य पहले ग्राउंड फ्लोर तक ही था। बाद में आगे फ्रेम स्ट्रक्चर पर निर्माण किया गया। बिल्डिंग के बेसमेंट मेंं हो रहा था यह नहींंय यह स्थल पर मलवा पड़ा होने के कारण नहीं पता चल सका।
जमा ही नहीं की तो कैसे मिले रिपोर्ट
एलडीए से जुडे सूत्रों ने बताया कि एलडीए अधिशासी अभियंता ने भले ही जांच टीम को मानचित्र और स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग की रिपोर्ट देने का वादा किया हो मगर सच यह है कि एलडीए यह रिपोर्ट ही निर्माण कराने वाले जमा नहीं कराता है। कामचलाऊ व्यवस्था में एलडीए के पास सिर्फ मानचित्र की प्रतिलिपि और उसकी परमिट संख्या ही रिकार्ड में रहती हैं। अब बिल्डिंग ढहने के बाद जब पूरी जांच स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग की रिपोर्ट पर टिकी है तो वही नहीं मिल रही है।
-अतिरिक्त निर्माण को लेकर जो काल बनाए गए उनकी ऊंचाई 6 मीटर और साइज 35 सेमी गुणा 35 सेमी है। ऐसे में कालम की ऊंचाई उसकी चौड़ाई की तुलना में अधिक है
- जो बिल्डिंग ढही उसके पास बनी बिल्डिंग की फाउंउेशन किस साल बनी और बिल्डिंग निर्माण किस साल मेंं हुआ यह जानकारी एलडीए के अधिशासी अभियंता ने नहींं दी।
- ढही बिल्डिंग का स्वीकृत ड्राइंग के तहत हुआ था कि नहीं और निर्माण की गुणवत्ता का पता लगाने के लिए उच्च तकनीकी संस्थान से जांच कराई जाए।
-ढही बिल्डिंग का निर्माण कितने क्षेत्रफल में अनुमन्य था और कितने में किया गया गया यह मौैके पर की गई जांच में स्पष्ट नहीं हो पाया। सेट बैक निर्माण में शामिल था कि नहीं यह भी साफ नहीं हो पाया।