बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार (आईसीडीएस) निदेशालय से एक महीने पहले स्थानांतरित किए गए एक भी कर्मचारी ने अपना कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। यह सभी कर्मचारी अब भी मुख्यालय आकर अलग से रजिस्टर पर हस्ताक्षर करते हैं। इन कर्मचारियों पर कार्रवाई की तैयारी हो रही है।
दरअसल, आईसीडीएस निदेशालय में लिपिक संवर्ग के सिर्फ 8 पद स्वीकृत हैं, लेकिन यहां कई वर्षों से करीब 50 कर्मचारी तैनात हैं। इनमें से कई पिछले 15-20 वर्षों से खुद को निदेशालय से संबद्ध कराकर अनाधिकृत रूप से जमे हैं। 10-12 लिपिकों पर तो भ्रष्टाचार के आरोप तक हैं।
इनके काकस की वजह से निदेशालय की गरिमा को ठेस पहुंची है। इसी कारण शासन ने पहले निदेशक को हटाया, फिर नए निदेशक को ऐसे कर्मियों हटाने का निर्देश दिया है। शासन की मंशा के अनुरूप नई निदेशक डॉक्टर सारिका मोहन ने लिपिकों को मूल तैनाती वाले जिलों में भेजने का निर्देश दिया था।
24 जून को ही 15 कर्मचारियों को स्थानांतरित किया गया था, लेकिन एक महीने बाद भी किसी ने नई तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। इसी तरह शेष कर्मचारियों के तबादले की सूची भी अभी तक जारी नहीं हो पाई है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि दूसरी सूची में 26 कर्मचारियों को निदेशालय से हटाने की स्वीकृति मुख्यमंत्री कार्यालय से मिल चुकी है।