दृष्टि सामाजिक सेवा संस्थान के विशेष बच्चे इन दिनों राखियां, पूजा थाल बनाने में व्यस्त हैं। इनकी लगन, इनका उत्साह और इनकी मेहनत एक सकारात्मक ऊर्जा से भरने के लिए काफी है। कोरोना की दहशत से घबराए लोगों को इनसे जरूर मिलना चाहिए। ये बच्चे इन दिनों राखियां बना रहे हैं। दरअसल इनकी यह व्यावसायिक ट्रेनिंग भी है ताकि आगे चलकर ये आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो सकें। इनके द्वारा ऑर्डर पर राखियां बनाई जा रही हैं।
कैंसर सर्वाइवर बच्चों की मांएं भी दिन-रात कर रहीं मेहनत
महामारी के इस दौर में आत्मनिर्भरता की एक सशक्त मिसाल हैं कैंसर सर्वाइवर बच्चों की मां। कैंसर पीड़ित बच्चों के लिए काम करने वाली संस्था ईश्वर वेलफेयर फाउंडेशन की मदद से सरला व उनके ग्रुप की महिलाएं इन दिनों देसी सामानों से राखियां तैयार कर रही हैं। खास बात है कि अब ये सभी महिलाएं ऑनलाइन बिजनेस में माहिर हो गई हैं।
दादी-पोते साथ मिलकर तैयार कर रहे राखी
मंजु जैन और उनके पोते अर्नव व अरहम जैन इस बार साथ मिलकर राखियां तैयार कर रहे हैं। मंजु कहती हैं कि कोरोना की वजह से इस बार बाजार जाना नहीं है, इसलिए घर के सामानों से ही हम राखियां तैयार कर रहे हैं। बहू रित जैन कहती हैं कि सासू मां के दिए टिप्स से ही राखियां बनाने में मजा भी आ रहा है। इस बहाने बच्चे भी कुछ न कुछ सीखते रहते हैं।