बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों के अंतरजनपदीय तबादले की नीति तय हो गई है। इस बार 17 हजार शिक्षकों के तबादले किए जाएंगे।
तबादले की प्राथमिकता तय करने के लिए छह श्रेणियां बनाई गई हैं। तबादले के लिए ऑनलाइन आवेदन ही स्वीकार किए जाएंगे।
यह फैसला बुधवार को निशातगंज स्थित निदेशालय में हुई बेसिक शिक्षा परिषद की बैठक में लिया गया।
रूकेगी तबादलों की धांधली
हर साल बेसिक शिक्षा अधिकारी अपने जिले के स्कूलों में शिक्षकों का जो समायोजन करते थे, वे अब ऐसा नहीं कर सकेंगे।
विशेष परिस्थितियों में केवल इक्का-दुक्का समायोजन ही इस बार होंगे। ऐसा समायोजन के नाम पर तबादलों की होने वाली धांधली रोकने के लिए किया गया है।
प्राथमिक स्कूलों में खाली पदों पर 17 हजार तबादले किए जाएंगे। इसके अलावा 72 हजार शिक्षकों की भी भर्ती सरकार करने जा रही है।
58 हजार शिक्षा मित्रों की भी नियुक्ति होनी है। इन सभी को इन्हीं स्थानों पर समायोजित किया जाएगा।
लिए जाएंगे ऑनलाइन आवेदन
तबादले के लिए ऑनलाइन आवेदन कब से लिए जाएंगे, इसकी तारीख सरकार तय करेगी।
इसके अलावा जिले स्तर पदोन्नति की प्रक्रिया 15 जुलाई तक हर हाल में पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षकों की पेंशन योजना के लिए प्रत्येक जिले में एक सीए की नियुक्ति की जाएगी।
इन्हें बेसिक शिक्षा परिषद आउटसोर्स पर रखेगी। बैठक की अध्यक्षता बेसिक शिक्षा के प्रभारी निदेशक डीबी शर्मा ने की। इस दौरान बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव संजय सिन्हा भी उपस्थित थे।
तबादले में यूं तय की जाएंगी प्राथमिकताएं
शिक्षकों के अंतरजनपदीय तबादले में सबसे पहले विकलांग शिक्षकों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके बाद गंभीर रूप से बीमार शिक्षकों को प्राथमिकता दी जाएगी।
तीसरी प्राथमिकता उन्हें दी जाएगी जिनकी पत्नियां गंभीर रूप से बीमार हैं। चौथी प्राथमिकता परिवार के किसी सदस्य की गंभीर बीमारी वाले शिक्षक को मिलेगी।
पांचवीं प्राथमिकता विधवा एवं परित्यगता को दी जाएगी। सबसे अंत में सामान्य महिला व पुरुष शिक्षक आएंगे।
मिला सीएल देने का अधिकार
प्राथमिक स्कूलों में पढ़ाने वाले सहायक अध्यापकों को आकस्मिक अवकाश देने का अधिकार स्कूल के ही प्रधानाध्यापक को दे दिया गया है।
सहायक अध्यापकों की सीआर लिखने का अधिकार भी प्रधानाध्यापकों को दिया गया है। अभी तक यह जिम्मा खंड शिक्षा अधिकारियों के पास था।
नाम रोशन करने वाले विद्यार्थियों का लगेगा शिलापट्ट
प्राथमिक स्कूलों से पढ़कर इंजीनियर व डॉक्टर सहित अन्य अहम पदों पर पहुंचने वाले मेधावी छात्रों के नाम का शिलापट्ट भी स्कूलों में लगाया जाएगा।
ऐसा इसलिए किया जा रहा ताकि यहां पढ़ रहे बच्चे उनसे प्रेरित हो सकें।