शिक्षा विभाग ने अभी हाल ही में 14 हजार शिक्षकों के अंतरजनपदीय स्थानांतरण किए हैं। विभागीय अधिकारियों ने पूरी पारदर्शिता के साथ ट्रांसफर की बात का ढिंढोरा पीटने की कोशिश की।
पर अंदर खाने में कुछ और ही चर्चा है। इस विभाग में एक कैबिनेट के अलावा तीन राज्य मंत्री हैं। कुछ मंत्रियों ने भी अंतर जनपदीय स्थानांतरण की सूची दी थी।
एक राज्य मंत्री ने 86 शिक्षकों की सूची दी थी और इसमें से दो को छोड़ बाकी हो गए। मंत्री जी इस पर खफा हो गए। इसके लिए बकाएदे पंचायत तक लगानी पड़ी। विभागीय अधिकारियों को तलब किया गया।
बैठक शुरू हुई तो तबादले की चर्चा छिड़ी। एक राज्य मंत्री ने बैठक के बीच में कहा सब तो ठीक है। पर अधिकारी अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं। मंत्रियों की सिफारिशों की अनदेखी की जा रही है।
उन्होंने अंतरजनपदीय स्थानांतरण के लिए जो सूची दी थी, उसमें से कुछ नाम शामिल तक नहीं किए गए। वह क्षेत्र की जनता को क्या मुंह दिखाएंगे। अगर अफसर यही करते रहे तो हो चुकी राजनीति।
मामला किसी तरह संभाला गया। कहा गया कि अगली सूची में देख लिया जाएगा। अब इससे आप स्वयं ही अंदाजा लगा ले कि ट्रांसफर में कितनी पारदर्शिता बरती गई होगी।