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खुशखबरीः अब भविष्य में कभी नहीं टकराएगीं ट्रेनें

Sat, 28 Feb 2015 01:24 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,लखनऊ
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रेल यात्रियों की सुरक्षा और उनकी सहूलियत के लिए रेल बजट में घोषित आरडीएसओ के प्रोजेक्ट इस साल जून से ही लागू कर दिए जाएंगे। कोहरे के समय ट्रेनों की टक्कर रोकने के लिए ट्रेन कोलिजन एवाइडेंस सिस्टम को जून से प्रमुख रेलखंडों पर लगा दिया जाएगा।
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अगले पांच साल में रेलवे के ए, बी और सी कैटेगरी के 10 हजार किलोमीटर रेलखंड यह डिवाइस लगने से रेड सिग्नल को पार करने या फिर आगे पटरी पर खड़ी ट्रेन में टक्कर की घटनाओं पर लगाम लग सकेगी।

आरडीएसओ ने इस प्रणाली का 90 प्रतिशत काम पूरा कर लिया है। रेल बजट में आरडीएसओ के 15 में से नौ सबसे बड़े प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल गयी है। नए प्रोजेक्ट पर 15 मार्च तक डीपीआर बनाने और एक अप्रैल से इसे शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
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इस बार के रेल बजट में आरडीएसओ के पांच नए प्रोजेक्ट शामिल किये गए हैं। जबकि इससे पहले तत्कालीन रेलमंत्री ममता बनर्जी ने तो आरडीएसओ के प्रोजेक्ट कम कर उसकी जगह आईआईटी खड़गपुर को इसे देने और वहां नया रिसर्च सेंटर खोलने की घोषणा कर दी थी।

मोदी के मेक इन इंडिया अभियान से मिलेगी मदद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया अभियान और डिजिटल इंडिया अभियान के तहत एक बार फिर आरडीएसओ को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसरो और डीआरडीओ जैसे बड़े वैज्ञानिक संगठन और देश भर के चुनिंदा आईआईटी इंस्टीटयूट के साथ मिलकर आरडीएसओ ने 12 फरवरी को लखनऊ में राउंड टेबल कांफ्रेंस कर भावी प्रोजेक्ट को समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए खाका तैयार किया।

आरडीएसओ के महानिदेशक पीके श्रीवास्तव का कहना है कि आरडीएसओ को जो भी प्रोजेक्ट मिले हैं उनको दिसंबर 2015 से पहले लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।

आरडीएसओ के ईडी रिसर्च इसी सप्ताह इसरो, डीआरडीओ और आईआईटी संस्थान जाकर प्रोजेक्ट को पूरा करने का डीपीआर बनाएंगे। जिस इंस्टीट्यूट के पास जो भी बेहतर तकनीक होगी उसे रेलवे की जरूरत के हिसाब से विकसित किया जाएगा।

ये होंगे खास प्रोजेक्ट

एडवांस नेवीगेशन सिस्टम
राउंड टेबल कांफ्रेंस में विमान के पायलटों को मिलने वाली मौसम की एडवांस सूचनाएं देने जैसी तकनीक रेल ड्राइवरों को मुहैया कराने पर चर्चा हुई। इंजन में लगे माइक्रोसाफ्ट प्रोसेसर की स्क्रीन पर इसरो की मदद से ड्राइवरों को उनके अगले स्टेशन के मौसम की जानकारी दी जाएगी।

अपशिष्ट निस्तारण प्रबंधन
ट्रेनों, रेलवे स्टेशनों और रेल कार्यालयों में रोजाना निकलने वाले हजारों टन कूड़ा का अपशिष्ट प्रबंधन कर उनके साफ सुथरे तरीके से निस्तारण और उनके इस्तेमाल से जैविक खाद बनाने जैसी सेवाओं के लिए कई आईआईटी मदद करेंगे।

वैक्यूम टॉयलेट सिस्टम
रेल में इस समय सबसे अधिक पानी का इस्तेमाल ट्रेनों के शौचालय में होता है। बायो टॉयलेट के बाद अब आरडीएसओ वैक्यूम टॉयलेट बनाएगा। अभी वैक्यूम टॉयलेट विमानों में इस्तेमाल हो रहे हैं। इससे टॉयलेट में केवल आधा लीटर पानी का ही इस्तेमाल होगा। ट्रेन के अपने गंतव्य पर पहुंचने पर पानी को अलग कर उसका शोधन किया जा सकेगा।

ये प्रोजेक्ट्स पर भी होगा काम

गैस टर्बाइन रेल इंजन -नवंबर 2015
डीजल इंजन पर खर्च होने वाले ईंधन की जगह पूरी तरह सीएनजी गैस से ट्रेन को चलाने के लिए विशेष प्रकाश का गैस टर्बाइन इंजन बनेगा। आरडीएसओ के एक्जक्यूटिव डायरेक्टर रिसर्च डीके अग्रवाल ने बताया कि सीएनजी का देश में अगले 80 साल तक के स्टॉक का पता चला है। इसलिए गैस टर्बाइन इंजन बनाकर इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा। इस इंजन के एक हिस्से में सीएनजी गैस सिलेंडर और दूसरे हिस्से में इंजन होगा।

बोगियों में सीढ़ी व सुंदरीकरण
अहमदाबाद के नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ डिजाइन की मदद से अनुभूति की तरह अब एसी और स्लीपर क्लास की बोगियों का भीतर से भी सुंदरीकरण होगा। सामान रखने के लिए विमान की तर्ज पर अलग व्यवस्था होगी। वाईफाई के इस्तेमाल के लिए  अलग गैलरी जबकि बुजुर्ग यात्रियों को ऊपरी सीट पर चढ़ने के लिए सीढ़ियां लगाने का डिजाइन बनेगा।

फायर अलार्म सिस्टम
आरडीएसओ ने आग लगने पर बजने वाले अलार्म सिस्टम को पहले ही तैयार कर लिया था। इसे दस ट्रेनों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लगाया जा चुका है। अब डीआरडीओ और आईआईटी की मदद से आग लगने पर बोगियों के भीतर उसके प्रभाव को कम करने और अपने आप ब्रेक लगाने जैसी तकनीक को अपनाने पर भी विचार चल रहा है। इससे आग के समय जानमाल ही कम हानि होगी।

मानवरहित क्रॉसिंग पर होगा अलार्म

आरडीएसओ ने पहले मानव रहित क्रॉसिंग पर ट्रेन के आने के समय अपने आप बजने वाले वार्निंग सिस्टम को बनाया था। कानपुर आईआईटी अब मानवरहित क्रॉसिंग पर रेडियो आधारित वार्निंग अलार्म सिस्टम बनाएगा। जिसे चोर चुरा नहीं सकेंगे। सेटेलाइट से मिले संकेत के आधार पर इसका हूटर ट्रेन के एक किलोमीटर करीब आते ही बजने लगेगा साथ ही इसकी रेड लाइट भी फ्लैश होगी।

बढ़ेगी अधिक माल वहन क्षमता
एक ही मालगाड़ी में वहन क्षमता का विकास कर अधिक माल ढुलाई करने के लिए 25 टन की क्षमता वाला वैगन एक्सल तैयार किया जा रहा है। इससे एक बार में 60 से 90 वैगनों वाली गाड़ियां आपस में जुड़कर आसानी से चलायी जा सकेंगी।

ट्रैक रिकॉडिंग सिस्टम
कोहरे में आए दिन पटरी चिटकने और गर्मियों में अधिक तापमान के कारण उनके फैलाव से होने वाली घटनाओं को रोकने के लिए ट्रैक रिकॉर्डिंग प्रणाली का विकास किया जाएगा। यह रेडियो आधारित प्रणाली आरडीएसओ को मौसम में बदलाव के कारण पटरियों में होने वाली गड़बड़ी को रोकने की रिपोर्ट देगी।
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सीवीसी कपलर से दौड़ेंगी 26 बोगियों की ट्रेनें

आरडीएसओ ने पांच साल पहले जिस सीवीसी कपलर का विकास किया था वह अब 26 बोगियों वाली ट्रेनों में इस्तेमाल की जाएगी। रेल बजट में चुनिंदा रेलखंड की 24 बोगियों वाली ट्रेनों में दो और बोगियां बढ़ाने की घोषणा हुई है।

दरअसल मालगाड़ी में सीवीसी कपलर लगते थे। अब यह कपलर लखनऊ मेल और काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस के साथ इलाहाबाद-हरिद्वार एक्सप्रेस में लग रहे हैं। वर्ष 2013 में कनकहा स्टेशन पर दुर्घटनाग्रस्त हुई हरिद्वार-इलाहाबाद एक्सप्रेस में सीवीसी कपलर होने के कारण यह ट्रेन पटरी से नहीं उतरी थी।

पहिया निकलने के बावजूद इसकी अंतिम दो बोगियां पटरी पर घिसटती चली गयीं। आरडीएसओ के अधिशासी निदेशक प्रशासन एके माथुर ने बताया कि पुष्पक एक्सप्रेस सहित अन्य प्रमुख ट्रेनों में सीवीसी कपलर लगने से जनरल क्लास के यात्रियों को भी राहत मिलेगी।
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