चक्रव्यूह का यह पहला द्वार है। दरअसल, सीट कन्फर्म नहीं होने पर वेटिंग वालों का टिकट ऑटोमेटिक निरस्त हो जाता है। ऑटोमेटिक कैंसिल होने वाले टिकट पर रेलवे 60 रुपये क्लेरिकल चार्ज के नाम पर काट लेता है।
ट्रेनों में दीपावली से चल रही कन्फर्म सीटों की मारामारी छठ तक जारी है। इस दौरान लखनऊ के करीब 80 हजार यात्री वेटिंग के चक्रव्यूह में फंसकर रह गए। भले ही ये यात्री सफर नहीं कर सके, रेलवे ने इनकी जेबों से 48 लाख रुपये निकाल लिए।
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सहूलियत की वजह से भारतीय रेलवे खान-पान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) की टिकटिंग वेबसाइट से 80 फीसदी तक यात्री टिकट बुक करते हैं। चक्रव्यूह का यह पहला द्वार है। दरअसल, सीट कन्फर्म नहीं होने पर वेटिंग वालों का टिकट ऑटोमेटिक निरस्त हो जाता है। ऑटोमेटिक कैंसिल होने वाले टिकट पर रेलवे 60 रुपये क्लेरिकल चार्ज के नाम पर काट लेता है। जबकि काउंटर से बनवाए जाने वाले टिकटों के मामले में वेटिंग वालों को यात्रा की सुविधा रेलवे उपलब्ध कराता है। इससे वेटिंग के यात्री जैसे-तैसे सफर पूरा कर लेते हैं।
रेलवे अधिकारी बताते हैं कि दीपावली से लेकर छठ पूजा तक पिछले करीब दो सप्ताह में उत्तर व पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ मंडलों के 80 हजार से अधिक यात्रियों का टिकट कन्फर्म नहीं हो सका। ऑनलाइन टिकट कैंसिल होने पर 60 रुपये की कटौती के बाद रिफंड किया गया। ऐसे में रेलवे को करीब 48 लाख रुपये की आमदनी हुई है। इससे अफसरों की बांछें खिली हुई हैं। रेलवे अफसर यह कहकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं कि यह पॉलिसी से जुड़ा मामला है।
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यात्रियों की जेबों पर कैंची चला रहा रेलवे, राउंड फिगर से कमा लिए 2500 करोड़
दैनिक यात्री एसोसिएशन के अध्यक्ष एसएस उप्पल इस मुद्दे को लेकर मुखर हैं। वह कहते हैं, रेलवे प्रशासन तरह-तरह के हथकंडे अपनाकर यात्रियों की जेबों पर कैंची चला रहा है। मसलन, टिकट बनवाने पर पांच रुपये के राउंड फिगर में पैसे लिए जाते हैं। यानी किसी स्टेशन का टिकट अगर 92 रुपये का है तो रेलवे 95 रुपये काटता है। बाकी के तीन रुपये अगले टिकट में भी एडजस्ट नहीं किए जाते। इससे रेलवे के खाते में 2500 करोड़ रुपये से अधिक जमा हो चुके हैं। ऐसे ही वेटिंग लिस्ट के टिकटों से भी रेलवे अपनी जेब भरता है।
तो इतनी लंबी वेटिंग क्यों देते हैं?
एसएस उप्पल ही नहीं, यात्री भी लगातार वेटिंग के मुद्दे को उठाते रहे हैं। यात्री अक्सर सवाल करते हैं- जब ट्रेन में कन्फर्म सीटें उपलब्ध नहीं कराई जा सकती हैं, तो इतनी लंबी वेटिंग क्यों दी जाती है? पुष्पक एक्सप्रेस जैसी ट्रेन में चार सौ तक वेटिंग पहुंच जाती है। ऐसे में वेटिंग के टिकट ऑटोमेटिक निरस्त होंगे ही और यात्रियों की जेब कटती रहेगी।