सपा शासनकाल में जल निगम में सहायक व अवर अभियंता और नैत्यिक लिपिक पदों पर हुई भर्ती में बड़े पैमाने पर अनियमितता सामने आने पर भर्तियां निरस्त करने के बाद सरकार अब दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के मूड में है। शासन स्तर से इस मामले में अब तक सामने आए दोषियों के बारे में जानकारी मांगी गई है।
निगम स्तर पर अनियमितता बरत कर नौकरी हासिल करने में कामयाब रहे 175 लोगों के साथ भर्ती प्रक्रिया के लिए गठित सात बोर्डों के तकरीबन 35 सदस्यों के खिलाफ एफआईआर की तैयारी है। जांच के दौरान 175 लोगों के खिलाफ अनियमितता के सुबूत मिल चुके हैं।
एसआईटी ने जो पड़ताल की थी, उसमें इनकी उत्तर पुस्तिकाओं में नंबरों व अन्य प्रविष्टियों को लेकर छेड़छाड़ की बात सामने आई। सोमवार रात को जल निगम में हुई पूरी भर्ती प्रक्रिया ही निरस्त करने के साथ ही 1304 भर्तियों में से 895 की सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं।
जानकार बताते हैं कि शासन स्तर पर भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अफसरों की जानकारी मांगी गई है। निगम के अधिकारियों में इसकी खासी चर्चा है। उधर, भर्ती प्रक्रिया निरस्त किए जाने से प्रभावित अभियंताओं व कर्मचारियों ने निगम के उच्च अधिकारियों से मिलकर अपनी बात रखी। निगम के डिप्लोमा इंजीनियर्स संगठन ने भर्तियां निरस्त किए जाने के विरोध में 6 मार्च को निगम मुख्यालय पर विरोध-प्रदर्शन करने का एलान किया है।