गंगा दशहरा बुधवार को मनाया जाएगा। पूजन-दान के साथ नदियों में स्नान की परंपरा है। लेकिन गोमती के कुड़ियाघाट पर गंदगी के चलते स्नान को लेकर संकट मंडरा रहा है। गोमा सेवकों का कहना है कि घाट इतने गंदे हैं कि वहां इस बार स्नान संभव नहीं है। ये लोग विरोध स्वरूप न तो यहां स्नान करेंगे और न ही आरती। गोमा सेवकों का कहना है कि वे लोग घाटों की सफाई करेंगे और चंद्रिका देवी मंदिर के घाट पर स्नान कर परंपरा का निर्वहन करेंगे।
मालूम हो कि गंगा दशहरा पर सुबह से चौक के कुड़ियाघाट पर गोमा सेवकों का सामूहिक स्नान अरसे से होता आया है। गोमा सेवक ऋद्धि किशोर गौड़ ने मंगलवार को बताया कि इस बार घाट इतने गंदे हैं कि यहां कीचड़युक्त पानी में स्नान संभव नहीं है। बुधवार को गंगा स्नान के दिन कई गोमा सेवकों ने कुड़ियाघाट की बजाय लगभग 20 किमी. पहले चंद्रिका देवी मंदिर के घाट पर स्नान की योजना बनाई है तो कईयों ने विरोध स्वरूप स्नान न करने का एलान किया है। श्री शुभ संस्कार समिति की ओर से तमाम गोमा सेवक सुबह गोमा में श्रमदान करेंगे, लेकिन स्नान नहीं करेंगे। हालांकि शाम को गोमती आरती होगी।
इसी दिन गंगा को धरती पर लाए थे भगीरथ
गोमतीनगर निवासी आचार्य प्रदीप ने बताया कि मान्यता है कि इसी दिन ब्राह्मण श्राप केचलते राजा सगर के60 हजार पुत्रों को तारने के लिए भगीरथ धरा पर गंगा को लाए थे। गंगा अवतरण के अलावा रामेश्वरम की प्रतिष्ठा भी हुई थी। गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान और गंगा पूजन का विशेष महत्व है। शाम को गंगा आरती से विशेष पुण्य मिलता है। हरिद्वार और बनारस के घाटों पर इस दिन सुबह और शाम को विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं। ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल के मुताबिक, तुलसीदास ने भी कलियुग में सद्गति के लिए भगवान श्रीराम और देव नदी गंगा के पवित्र जल को ही आधार माना है।