मंजिल तक जल्द पहुंचाने के लिए बनाए गए एक्सप्रेस वे अब दुर्घटना का कारण बन रहे हैं। हाल ही में यमुना एक्सप्रेस-वे पर हुए दर्दनाक हादसा में 29 लोगों की जान चली गई। हलांकि इसका करण चालक को झपकी आना व ओवर स्पीडिंग सामने आया।
अब हो चुके कई अन्य हादसों व उनकी जांच में भी यही बात सामने आई। इसके बाद एक्सप्रेस-वे पर सुरक्षा व निगरानी की व्यवस्थाओं पर कई सवाल खड़े हुए। इसलिए रिपोर्ट मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार की रात परिवहन मंत्री व अन्य अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान सीएम ने यमुना एक्सप्रेस-वे व लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे के लिए नए सिरे से 'सेफ्टी प्लान' बनाने के निर्देश दिए।
सोमवार को तड़के यमुना एक्सप्रेस-वे पर हुए हादसे की जांच को सीएम योगी ने तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी गठित करके 24 घंटे में रिपोर्ट मांगी थी। समिति ने मंगलवार की सुबह रिपोर्ट सौंप दी। प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार के अनुसार जांच रिपोर्ट में चालक को झपकी आने व ओवर स्पीडिंग की बात कही गई थी।
मंगलवार की शाम को सीएम ने परिवहन मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह, मुख्य सचिव डॉ. अनूप चंद्र पांडेय, डीजीपी ओपी सिंह, अपर मुख्य सचिव व उप्र एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अवनीश कुमार अवस्थी और प्रमुख सचिव परिवहन आराधना शुक्ला के साथ लोकभवन में बैठक की। इस दौरान जांच रिपोर्ट के तथ्यों संग उसमें दिए गए सुझावों पर भी विस्तृत चर्चा की गई।
सीएम ने मुख्य सचिव, डीजीपी और प्रमुख सचिव परिवहन को निर्देश दिए कि एनएचएआइ, यूपीडा, लोक निर्माण विभाग, परिवहन विभाग सहित सभी संबंधित विभाग मिलकर नए सिरे से सेफ्टी प्लान बनाएं। सीएम ने कहा कि प्लान ऐसा बनाया जाए जिससे हादसों को कम से कम किया जा सके।
साथ ही दुर्घटना होने पर राहत-बचाव कार्य तेजी से हो। सुरक्षा मानकों का पालन यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे सहित निर्माणाधीन परियोजनाओं में भी जरूर हो। मुख्यमंत्री ने परिवहन विभाग में जरूरत अनुसार रिक्त पद भरने के भी निर्देश दिए।