लखनऊ। लखनऊ-रायबरेली मार्ग पर टोल से पहले निगोहां के पास गांवों और कस्बों से होकर गुजरने वाले छोटे रास्तों पर पिछले कुछ समय से मालवाहक वाहनों की आवाजाही बढ़ गई है। पिकअप, डीसीएम और ट्रक सर्विस रोड व छोटे रास्तों से गुजर रहे हैं। शुरुआत में इसे टोल बचाने और दूरी कम करने की कोशिश माना गया, लेकिन जांच में इसके पीछे जीएसटी चोरी का खेल सामने आया है। एक ही बिल और ई वे बिल पर दो से तीन बार माल का परिवहन किया जा रहा है।
इसी तरह कानपुर मार्ग पर नवाबगंज टोल से पहले बंथरा के पास सर्विस रोड के इस्तेमाल से जीएसटी चोरी का मामला सामने आ चुका है। अधिकारियों के मुताबिक वाहन हाईवे से गुजरने के बजाय छोटे रास्तों का इस्तेमाल करते हैं, ताकि टोल प्लाजा और जांच से बचा जा सके।
रात एक बजे जारी होता ई वे बिल, 48 घंटे में तीन बार ढुलाई
एक ई वे बिल की वैधता करीब 48 घंटे होती है। इसी अवधि में एक ही बिल पर माल को दो से तीन बार अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाया जाता है। पहली बार वाहन हाईवे से गुजरता है। इसके बाद टोल और जांच से बचने के लिए छोटे या सर्विस मार्ग का इस्तेमाल किया जाता है। अधिकारियों के अनुसार कई मामलों में ई वे बिल रात 12 से एक बजे के बीच जारी कराया जाता है।
अपर आयुक्त ग्रेड-दो (विशेष अनुसंधान शाखा) मनोज कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि कुछ माह पहले कानपुर और फैजाबाद मार्ग पर एक ही ई वे बिल पर एक से अधिक बार माल का परिवहन करते वाहन पकड़े गए थे। दो दिन पहले रायबरेली मार्ग पर भी दो वाहन पकड़े गए हैं।
दो वाहनों में मिला 29 लाख का पान-मसाला
सचल दल-पंचम के अधिकारी अमित तिवारी ने दो दिन पहले रायबरेली हाईवे से हटकर सर्विस रोड पर एक डीसीएम पकड़ी। इसमें करीब 24 लाख रुपये का पान-मसाला लदा था। जांच में सामने आया कि चालक के पास मौजूद बिल और ई वे बिल पर इससे पहले भी पान-मसाला व तंबाकू उत्पाद कौशांबी तक ले जाए जा चुके थे। टोल रिकॉर्ड से भी इसकी पुष्टि हुई। वहीं, निगोहां पुलिस ने भी दो दिन पहले 5.60 लाख रुपये का पान-मसाला लदी पिकअप पकड़ी। इस पर 3.48 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।