लखनऊ। सिंथेटिक रबर के दाम बढ़ने से टायर कंपनियों ने महज 25 दिनों में टायरों की कीमतों में 6-7 प्रतिशत तक बढ़ोतरी कर दी है। जीएसटी में 10 प्रतिशत की कमी से जो राहत उपभोक्ताओं को मिली थी, वह अब खत्म होती दिख रही है।
ट्रैक्टर टायरों की कीमतों में जहां लगभग 1 से 1.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, वहीं कार टायरों के दाम 7 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। कारोबारियों के मुताबिक पेट्रोकेमिकल उत्पादों की आपूर्ति में कमी के कारण सिंथेटिक रबर महंगी हुई है, जिससे टायर निर्माण लागत बढ़ी है। पिछले तीन वर्षों में टायरों के दाम कुल मिलाकर 34 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं।
कारोबारियों का कहना है कि महंगे क्रूड ऑयल के चलते सिंथेटिक रबर के प्रमुख घटक स्टाइरीन और ब्यूटाडाइन की कीमतों में भी उछाल आया है। टायर निर्माण में करीब 70 प्रतिशत हिस्सा रबर का होता है, जबकि इसमें कार्बन का भी उपयोग होता है। इन दोनों की कमी से कीमतों पर सीधा असर पड़ा है।
हजरतगंज के टायर कारोबारी माजिद के अनुसार रबर और कार्बन दोनों की शॉर्टेज के चलते कीमतें बढ़ी हैं। वहीं, रिंग रोड के कारोबारी विशाल जायसवाल बताते हैं कि सबसे ज्यादा असर छोटी गाड़ियों यानी कार टायरों पर पड़ा है। उदाहरण के तौर पर, 3000 रुपये का टायर अब 3300 रुपये और 5000 रुपये का टायर करीब 5300 रुपये तक पहुंच गया है।
कारोबारियों के अनुसार जीएसटी में कमी के दौरान ग्राहकों को राहत मिली थी, लेकिन अब बढ़ती लागत के चलते कीमतें फिर पुराने स्तर पर पहुंचने लगी हैं।
डीलरों का मार्जिन घटा, कंपनियां कमा रहीं मुनाफा
जीएसटी घटने के समय कंपनियों ने कीमतें कम करने के लिए डीलरों का मार्जिन घटा दिया था। अब कीमतें बढ़ाई जा रही हैं, लेकिन डीलरों का मार्जिन नहीं बढ़ाया गया है। कारोबारियों का कहना है कि पिछले 4-5 वर्षों से उनका मार्जिन स्थिर है, जबकि कंपनियां लगातार दाम बढ़ा रही हैं।
- विशाल जायसवाल, टायर कारोबारी, रिंग रोड
हर महीने बढ़ते हैं दाम, अप्रैल में अतिरिक्त उछाल
आम तौर पर टायरों की कीमतों में हर महीने 1 से 1.5 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होती है, लेकिन अप्रैल में 4-5 प्रतिशत अतिरिक्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे खासकर निम्न और मध्यम वर्ग के उपभोक्ताओं पर आर्थिक दबाव बढ़ा है। पिछले 2-3 वर्षों में टायरों की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है।
- माजिद, टायर कारोबारी, हजरतगंज