जिला समाज कल्याण अधिकारी (विकास) ने उत्पीड़न करने के इरादे से किए गये तबादले से क्षुब्ध होकर नौकरी से इस्तीफा (त्याग पत्र) दे दिया। बृहस्पतिवार को अधिकारी रणजीत सिंह ने निदेशक को भेजे गये पत्र इस्तीफे में कहा कि लखनऊ में तैनाती के 11 माह ही हुए थे कि लखीमपुर खीरी तबादला कर दिया गया था। लेकिन मुख्यमंत्री के निर्देश पर तबादला निरस्त हो गया था।
तबादला निरस्त होने के सात महीने बाद एक बार सात मार्च 2019 को हरदोई जिला समाज कल्याण अधिकारी के पद पर स्थानांतरण कर दिया गया। यह तबादला मध्य सत्र में हुआ जिसे जनहित एवं विभागीय हित बताया गया। जबकि वास्तविकता यह कि मेरा बार-बार स्थानांतरण जनहित के कारण नहीं कुछ निजी हित एवं बदनीयती से किया गया है।
पत्र में यह भी कहा कि मैने यह इस्तीफा दु:ख एवं पीड़ा के कारण नहीं, बल्कि सोच समझ कर इस पद से त्याग पत्र दे रहा, जिसे स्वीकार कर मुझे अवगत कराए।
भ्रष्टाचारी चला रहे विभाग
जिला समाज कल्याण अधिकारी रणजीत सिंह ने निदेशक को पत्र के जरिये बताया कि उसका बार-बार स्थानांतरण किसी शासकीय नीति के तहत नहीं, बल्कि कुछ भ्रष्टाचारी तत्वों के द्वारा पर्दे के पीछे से समाज कल्याण विभाग को चला रहे हैं। जिसमें कई अफसरों का भी गठजोड़ है। जो मुझे हटवा करके मन पसंद का अधिकारी तैनात कराकर सही गलत कार्य करा सके।
सात साल जमे पर कार्रवाई नहीं
लखनऊ जनपद में दूसरे जिला समाज कल्याण अधिकारी केएस मिश्र जो सात साल से लखनऊ में ही तैनात हैं। मुख्य सचिव की स्थानांतरण नीति उनके ऊपर लागू नहीं होती। जबकि मेरा दो बार स्थानांतरण हो चुका।
निदेशक नहीं नियुक्ति प्राधिकारी
जिला समाज कल्याण अधिकारी रणजीत सिंह का पत्र व्हाट्सएप के जरिये मिला। जिसका उनको जवाब दिया कि निदेशक उनका नियुक्ति प्राधिकारी नहीं है। और न ही निदेशालय से उनका तबादला किया गया है। उन्होंने उचित माध्यम से अर्थात निदेशक के द्वारा शासन को पत्र भेजने के लिए इंगित किया है। वह कोई कार्रवाई चाहते तो सीधे शासन में सक्षम स्तर पर पत्र भेजें, क्यों कि उनका नियुक्ति प्राधिकारी शासन है।
जेपी चौरसिया, निदेशक समाज कल्याण