उम्र 75 साल। नाम मधुबन यादव। लखीमपुर के निघासन तहसील के बौधियाकला गांव में रहते हैं। दो दिन पहले जब वे गांव से 4 किमी दूर काली मंदिर गए थे तो बाघिन ने अपने दो अर्द्धवयस्क शावकों के साथ उन पर हमला कर दिया।
इससे एकबारगी तो बुजुर्ग मधुबन लड़खड़ा गए, लेकिन फिर हिम्मत जुटाई और उससे भिड़ गए। यहां तक कि बाघिन ने उनका सिर अपने मुंह में जकड़ लिया। मधुबन ने होशो-हवास बनाए रखा और पूरी ताकत से खुद को बाघिन से अलग कर दिया।
उनकी फुर्ती और हौसला देख बाघिन और उसके दोनों शावक पीछे हट गए। मधुबन किसी तरह मंदिर तक पहुंचे तो गिर पड़े। वहां मौजूद लोगों ने उन्हें निघासन सीएचसी पहुंचाया जहां से लखीमपुर ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर उन्हें राजधानी के केजीएमयू के लिए रेफर किया गया।
फिलहाल मधुबन केजीएमयू के सर्जिकल वार्ड की इमरजेंसी में जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वे कुछ बोल नहीं पा रही हैं, हालांकि केजीएमयू के उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वेद प्रकाश ने उनकी हालत खतरे से बाहर बताई है।
टांके इतने कि गिनते न बने
डेमो पिक
- फोटो : Amar Ujala
उनके जख्म बहुत गहरे नहीं हैं। शनिवार को उन्हें प्लास्टिक सर्जरी विभाग में शिफ्ट किया जाएगा, जहां उनकी सर्जरी की जाएगी।उनके छोटे बेटे शिवशंकर ने बताया बुधवार को जब उसके पिता दुधवा नेशनल पार्क की बेलरायां रेंज के किलाकोठी क्षेत्र स्थित स्थित मंदिर से थोड़ी दूर झाड़ियों में गए थे तभी बाघिन ने उन पर हमला किया था। उस वक्त उनके पास कोई हथियार या लाठी तक नहीं थी।
डॉक्टरों ने बताया कि मधुबन के जबड़े की हड्डी टूटी हुई है। टांकों की गिनती नहीं की जा सकती है। कई जगह बहुत टांके देने की वजह से पूरा सिर सिला हुआ नजर आ रहा है।
बाघ विशेषज्ञों के अनुसार आम परिस्थतियों में बाघ इनसान पर हमला नहीं करता। चूंकि मधुबन दीर्घ शंका के समय वे बैठे हुए थे, ऐसे में बाघिन को वे किसी मनुष्य के बजाय किसी शिकार की तरह नजर आए होंगे, जब वे उठते तब तक बाघिन ने उन पर हमले कर दिया था।
अधीक्षक डॉ. वेद प्रकाश ने बताया कि मधुबन खतरे से बाहर हैं। उनके जख्म बहुत गहरे नहीं हैं। शनिवार को उन्हें प्लास्टिक सर्जरी विभाग में शिफ्ट किया जाएगा, जहां उनकी सर्जरी की जाएगी।