चिड़ियाघर की निदेशक अदिति शर्मा ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस हर साल 29 जुलाई को मनाया जाता है। यह दिवस बाघों के संरक्षण और उनकी घटती संख्या के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। बाघ हमारे पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, और उनकी रक्षा करना न केवल जैव विविधता को बनाए रखने के लिए आवश्यक है, बल्कि यह पर्यावरण संतुलन के लिए भी जरूरी है।
यूपी 205 बाघों का है निवास स्थान
चिड़ियाघर और टाइगर रिजर्व को छोड़ दिया जाए तो प्रदेश इस समय 205 बाघों का निवास स्थान है। वन विभाग के अनुसार, यह आंकड़ा साल 2022 की है जबकि, 2018 में इनकी संख्या 173 थी। यानी चार साल के अंदर 32 बाघों की संख्या बढ़ी है। वन विभाग के अनुसार, वन संरक्षण अभियान का ही नतीजा है कि यहां हर साल बाघों की संख्या में इजाफा हो रहा है।
उत्तर प्रदेश में बाघों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। वर्ष 2018 में हुई गणना में यूपी में जहां 173 बाघ थे, वहीं 2022 में बढ़कर यह संख्या 222 हो गई। वहीं, मानव वन्यजीव संघर्ष को कम करने में बाघ मित्र भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी यूपी के इस प्रयास की सराहना कर चुके हैं। पीलीभीत, दुधवा, अमानगढ़ व रानीपुर टाइगर रिजर्व में भी बाघ संरक्षण को लेकर कार्य किए जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर अनेक आयोजन भी किए जाएंगे।