तीसरे दिन भी वन विभाग की टीम खाली हाथ रही। न तो उसे बाघ का किया कोई शिकार मिला और न ही पैरों के निशान। 20 अक्तूबर के पहले बाघ ने माल के गोधन गांव में शिकार किया था। इस हिसाब से करीब दस दिन हो गए और तब से बाघ ने कुछ नहीं खाया।
उसके भूखे रहने के अंदेशे में ग्रामीण और विभाग के अधिकारियों की नीदें उड़ गई हैं। साथ ही बाघ के मूवमेंट का कोई निशान न मिलना भी लोगों में दहशत पैदा कर रहा है।
टीम ने मंगलवार को भी करीब सात घंटे तक 18 किलोमीटर तक सामूहिक कांबिंग की लेकिन कुछ पता न चला।
विशेषज्ञों की अगुवाई में मंगलवार सुबह टीम ने कटौली, मलहा, रहमानखेड़ा के जंगलों में कांबिंग शुरू की, लेकिन टीम को नए पगमार्क नहीं ट्रेस हुये।
एक इनपुट पर कांबिंग टीम ने आम विशेषज्ञ पद्मश्री कलीमुल्लाह के बागों के पास तक कांबिंग की, लेकिन वहां भी कुछ ऐसा नहीं मिला।
उधर, मंगलवार को दुधवा में कैंप करने वाली टीम के सारे सदस्य ऑपरेशन से जुड़े। टीम ने यहां मलहा-कटौली से जुड़े सारे जंगलों में कांबिंग कर 5-6 नए स्थानों पर कैमरा ट्रैप लगाने की प्लानिंग की।
क्षेत्र में ग्रामीणों की ज्यादा मूवमेंट केचलते टीम ने इसे रोका। टीम बुधवार से कैमरा ट्रैप लगाने की प्लानिंग कर रही है।
डीएफओ अवध एससी यादव ने बताया कि मंगलवार को न तो कहीं से नया पगमार्क टीम को ट्रेस हुआ और न ही उसे देखे जाने की कोई सूचना ही आई। बुधवार को भी कांबिंग जारी रहेगी।