कहानी पूरी फिल्मी है। दो-ढाई साल पहले बहन जी के कार्यकाल में कड़कड़ाते जाड़े में राजधानी में एक बाघ बहादुर आ पहुंचा था।
तब भी बाघ की दहाड़ ने विभाग को हिला दिया था। बाघ की हरकत पर तब विभाग के दो आला अधिकारी दिन रात राम-राम कर किसी तरह समय काट रहे थे, क्योंकि तब वे चाहते थे कि किसी तरह बस उनका रिटायरमेंट बेरोकटोक हो जाए।
खैर फील्ड अफसरों संग बाघ ने भी उन्हें मायूस नहीं किया। एक-एक कर विभाग के दो आला अधिकारियों का रिटायरमेंट हो गया।
अब ढाई साल बाद फिर से एक बाघ बहादुर ने विभाग की नींद उड़ा दी है। विभाग में फुसफुसाहट होने लगी है कि ये बाघ भी बड़े साहब को सही-सलामत रिटायर होने भी देगा या नहीं।
बड़े साहब सतर्क हो गए हैं और बाघ की लोकेशन की लगातार रिपोर्ट ले रहे हैं।
कहीं ऐसा न हो कि कोई ऐसा पंजा लग जाए जो रिटायरमेंट के वक्त गहरा घाव दे जाए। यह घाव तो जल्द भरने वाला भी नहीं होगा।