इलास्टोग्राफी नाम की तकनीक से थायरॉयड ग्लैंड की कोशिकाओं की ‘हार्डनेस और सॉफ्टनेस’ की जांच की जाएगी। ग्लैंड हार्ड निकली को उसे कैंसर होने की आशंका माना जाएगा।
एसजीपीजीआई में शुक्रवार से शुरू हुई इंडोक्राइन ट्यूमर समिट में ये जानकारी इंडोक्राइन विभाग के डॉ. सुशील गुप्ता ने दी। उन्होंने बताया कि इलास्टोग्राफी तकनीक से 80 फीसदी तक कैंसर की पहचान संभव है।
इसमें अल्ट्रासाउंड से गांठ की जांच की जाती है। गांठ कड़ी होती है तो उसमें कैंसर होने की आशंका अधिक होती है। गांठ मुलायम होती है तो उसमें कैंसर की आशंका नहीं होती। अल्ट्रासाउंड से गांठ की कोशिकाओं के कड़ा या मुलायम होने की जांच की जाती है।
इंडोक्राइन सर्जरी विभाग के प्रो. अमित अग्रवाल ने बताया कि कई ऐसे थायरॉयड कैंसर होते हैं जो एक से दूसरी पीढ़ी में चले जाते हैं। ऐसे में बच्चों में कैंसर होने की आशंका होती है तो जीन स्तर पर ही उसका पता चल जाता है। नई जांचों से उस विकृत जीन का पता लगाकर उसे निकाल दिया जाता है।
प्रो. सुशील गुप्ता ने बताया कि गले में होने वाली सभी गांठ कैंसर नहीं होती हैं। आमतौर पर 15 से 20 फीसदी लोगों के गले में गांठ होती है उनमें से 1 या 2 फीसदी में ही कैंसर होता है। इसलिए जरूरी नहीं है कि सभी तरह की गांठ की सर्जरी कर दी जाए।