एसटीएफ की टीम द्वारा 34 लाख की लूट की वीडियो क्लिप सोशल मीडिया में वायरल होने पर लखनऊ परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक एसके भगत ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कलानिधि नैथानी को जांच के आदेश दिए थे। पीड़ित के बयान दर्ज करने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने एयरपोर्ट से लेकर बंथरा थाने तक विभिन्न स्थानों के सीसीटीवी फुटेज एकत्र कराए। एसटीएफ की टीम द्वारा एयरपोर्ट मोड़ पर ई-रिक्शा ओवरटेक करके लुकमान व उसके साथियों के पकड़े जाने की पुष्टि हुई। बंथरा थाने में छानबीन में स्पष्ट हुआ कि एसटीएफ के उपाधीक्षक विजय यादव ने प्रभारी निरीक्षक बृजेश कुमार सिंह की कुर्सी पर बैठकर पूछताछ की थी।
एसटीएफ टीम की मंशा पर उठे सवाल
जांच में फंसी एसटीएफ की टीम ने बरामद विदेशी मुद्रा को कानपुर के अनवरगंज थाने में दाखिल किए जाने की बात कही, लेकिन दो आरोपियों के साथ रकम का दाखिला सोशल मीडिया पर क्लिप वायरल होने के बाद का था। सवाल उठा कि एयरपोर्ट मोड़ से विदेशी मुद्रा के साथ पकड़े गए लुकमान और उसके साथियों को नियमानुसार सरोजनीनगर थाने ले जाना चाहिए था लेकिन एसटीएफ की टीम करीब चार घंटे बाद बंथरा थाने ले गई। बरामद विदेशी मुद्रा को बंथरा थाने में भी दाखिल नहीं किया। जांच रिपोर्ट पर आला अफसरों ने माना कि एसटीएफ टीम की मंशा 34 लाख की विदेशी मुद्रा हड़पने की थी। मामला तूल पकड़ने पर रकम कानपुर के अनवरगंज थाने में जमा की गई।
रोजनामचा में एटीएस की पूछताछ
बंथरा थाने के रोजनामचा में तीन मार्च की रात 9:08 बजे वरिष्ठ उपनिरीक्षक की तरफ से आख्या दर्ज कराई गई थी। इसमें एटीएस के निरीक्षक जैनुद्दीन अंसारी व उनके पुलिस उपाधीक्षक की टीम द्वारा कुछ लोगों को थाने लाकर पूछताछ किए जाने का उल्लेख किया गया था। जांच में खुलासा हुआ कि राजधानी में तैनात रह चुके निरीक्षक जैनुद्दीन अंसारी और बंथरा के प्रभारी निरीक्षक बृजेश सिंह के बीच मधुर संबंध थे। इसके चलते वह लुकमान व उसके साथियों को सरोजनीनगर के बजाय बंथरा थाने ले गए थे लेकिन एसटीएफ की टीम को रोजनामचा में एटीएस लिखे जाने का राज स्पष्ट नहीं हुआ।