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तीन साल में सपा सरकार ने किए तीन 'खास काम'

Sat, 14 Mar 2015 09:27 AM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
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अखिलेश यादव की सरकार ने तीन साल पूरे कर लिए। अखिलेश सरकार ने इन तीन सालों में बड़े उतार-चढ़ाव देखे। इन तीन सालों में विकास के लिए कई बड़े कदम भी उठाए गए। इनमें कुछ योजनाएं तेजी से आगे बढ़ीं तो कई अभी तक कागजों से बाहर नहीं आ पाई हैं।
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आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे, लखनऊ मेट्रो व राजधानी की सीजी सिटी को सरकार की विकास वाले चेहरे के तौर पर देख सकते हैं तो आगरा व कुशीनगर में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, लखनऊ के अलावा दूसरे शहरों में आईटी सिटी व कई अहम चुनावी वादे अभी तक जमीन पर नहीं उतर पाए हैं।

सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने जिस किसान दुर्घटना बीमा योजना को शुरू कर किसान हितैषी छवि बनाई थी, अखिलेश ने उसकी बीमा राशि को एक लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने का काम किया।
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गरीबों के लिए केंद्र सरकार की इंदिरा आवास योजना जरूर थी, लेकिन प्रदेश सरकार ने बीपीएल सूची के बाहर वाले गरीबों के छत के सपने पूरे करने की ओर कदम बढ़ाया। लोहिया आवास योजना को अच्छी पहल के रूप में देख सकते हैं।

समाजवादी पेंशन को पुरानी पेंशन योजनाओं का बदला रूप कह सकते हैं, लेकिन पहले से ज्यादा लोगों को इसका फायदा देने की पहल तो अखिलेश सरकार ने की ही है। 45 लाख लोगों को इस पेंशन के दायरे में शामिल किया गया है।

सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की हाजिरी, बाहर की दवाइयां लिखने और मरीजों के प्रति डॉक्टरों के रवैये में भले ही सरकार बहुत कुछ न कर पाई हो लेकिन 102 व 108 एंबुलेंस सेवा का श्रेय सरकार को जरूर जाता है। कई खामियों के बावजूद यह एंबुलेंस सेवा तमाम लोगों की जिंदगी बचाने में सफल रही है। वहीं सरकार ने तीन साल में तीन खास काम भी किए।

ये हैं तीन साल में किए गए तीन खास काम

1- आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे: इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे को बड़ा कदम कहा जा सकता है। सरकार की इस पहल से न सिर्फ लखनऊ से आगरा की छह घंटे से ज्यादा की दूरी चार घंटे में सिमट जाएगी बल्कि एनसीआर क्षेत्र का विकास मध्य यूपी तक नजर आने की उम्मीद की जा रही है।

एक्सप्रेस-वे के किनारे मंडियां बनने से किसानों को अपने उपज का उचित मूल्य मिलने की उम्मीद बढ़ी है तो कई कंपनियों के नए प्रोजेक्ट के साथ दस्तक की सुगबुगाहट ने रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीदें बढ़ाई हैं।

2- आईटी सिटी से ‘सीजी सिटी’ तक
सरकार ने आईटी सेक्टर को युवाओं के लिए रोजगार के बड़े अवसर के रूप में पेश करते हुए राजधानी व आगरा में आईटी सिटी स्थापित करने का वादा किया था।

लखनऊ में आईटी सिटी से भी बड़ी परिकल्पना को आगे बढ़ाते हुए सीजी सिटी का प्लान पेश कर दिया। यहां एचसीएल के सहयोग से 100 एकड़ में आईटी सिटी की स्थापना हो रही है तो आईआईआईटी, विश्व स्तरीय कैंसर संस्थान, पीपीपी मोड में मेडिसिटी, सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, आधुनिक दुग्ध प्रसंस्करण प्लांट व प्रशासनिक प्रशिक्षण अकादमी जैसी योजनाएं अब इसका हिस्सा हैं। पर सरकार ने आश्चर्यजनक तरीके से आगरा आईटी सिटी पर कदम पीछे खींच लिए।

हालांकि आगरा, मेरठ और कानपुर में आईटी पार्क की ओर कदम बढ़ा दिया है। इससे इन शहरों में आईटी से जुड़े कारोबार को एक नया प्लेटफॉर्म मिलने की संभावना है।

3- ताकि शहरों में सपा को मिले मेट्रो रफ्तार- सपा सरकार ने मेट्रो ट्रेन जैसे प्रोजेक्ट के जरिये शहरों में अपना आधार बढ़ाने की पहल की। लखनऊ में मेट्रो का काम जमीन पर दिखना शुरू हो गया है। सरकार ने इसी चुनावी सौगात बनाने के लिए अगले विधानसभा चुनाव से पहले पूरा करने की डेडलाइन भी तय कर रखी है।

अगले चरण में मेट्रो आगरा, कानपुर, वाराणसी व मेरठ में मेट्रो दौड़ाने का ऐलान किया है। राजधानी में यदि दो साल में सरकार मेट्रो को दौड़ने की पोजिशन में पहुंचा पाई तो इसे वह बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश कर पाएगी। दूसरे शहरों में मेट्रो के काम यदि जमीन पर आ पाए तो फिर सरकार को अपनी पीठ ठोकने का पूरा मौका मिल जाएगा।

इन क्षेत्रों ने किए ये बड़े काम

- ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ती परिवहन सुविधा के लिए लोहिया ग्रामीण परिवहन सेवा का शुभारंभ।
- अंबेडकर ग्राम विकास योजना की तरह लोहिया समग्र ग्राम योजना।

- राजधानी में 50 हजार दर्शकों की क्षमता का अत्याधुनिक क्रिकेट स्टेडियम।
- कब्रिस्तान की चारदीवारी निर्माण व अंत्येष्टि स्थलों के विकास के काम।

- महिलाओं को सुरक्षा के लिए 1090 सहायता केंद्र और 1090 मोबाइल एप का विकास।
- पशुपालन को बढ़ावा देने व दुग्ध विकास के लिहाज से कामधेनु योजना।

- सचिवालय का नया एनेक्सी भवन।
- सैफई में सूबे के दूसरे चिकित्सा विश्वविद्यालय की स्थापना।
- जनेश्वर मिश्र पार्क व जय प्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय केंद्र का निर्माण।

अधूरे वादे: पहले बढ़ाए फिर खींच लिए कदम
- 30 से 40 वर्ष के बेरोजगार युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देना।
- रिक्शाचालकों को बैट्री पावर्ड रिक्शा देने का काम।
- हाईस्कूल मुस्लिम बेटियों की मदद के लिए ‘हमारी बेटी-उसका कल’ योजना।

- हाईस्कूल छात्रों को टैबलेट देने का वादा।
- बुजुर्गों को कंबल, महिलाओं को साड़ी देने का वादा।
- किसानों को लाभकारी मूल्य देने के लिए किसान आयोग के गठन का काम।

- आगरा में आईटी सिटी की स्थापना। एक बजट में ऐलान, दूसरे में चुप्पी।

युवाओं की उम्मीदें ज्यादा, परवान चढ़े कम

प्रदेश सरकार से युवाओं को उम्मीद थी कि वह खाली पदों को भरेगी। सूबे के सरकारी विभागों में पांच लाख से ज्यादा पद खाली हैं। पर, यह सरकार भी ऐसी सियासत में उलझी कि सरकारी विभागों में रिक्त पदों पर भर्तियां तो शुरू नहीं कर पाई, शिक्षकों की भर्ती में अड़ंगा डालने वाली सरकार की छवि जरूर पेश की।

इधर, सुप्रीमकोर्ट के आदेश से ही सही, सरकार ने प्राइमरी स्कूलों में 72825 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को तेजी से बढ़ाया है। जूनियर हाईस्कूलों में भी भर्तियां शुरू कराई। सरकारी विभागों के रिक्त पदों को भरने के लिए अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का गठन और उसके द्वारा सुस्ती से ही सही भर्ती का काम शुरू करने को सरकार अपनी उपलब्धि में शामिल कर सकती है।

इन मुद्दों पर सरकार ने पीछे खींचे कदम

स्पष्ट बहुमत की सरकार से क्या कोई अपने चुनावी वादों और नीतिगत फैसलों को बार-बार बदलने की उम्मीद कर सकता है? अखिलेश सरकार ने ऐसा पूरे तीन साल किया। सरकार कई बार अपने फैसलों को बदलने के लिए विपक्ष को ताना मारते नजर आई।

मुफ्त लैपटॉप, कन्या विद्याधन, बेरोजगारी भत्ता, मुस्लिम लड़कियों के पढ़ाई व विवाह में मदद के लिए शुरू की गई हमारी बेटी-उसका कल तथा महिलाओं के लिए दो-दो साड़ी व बुजुर्गों को कंबल देने जैसी योजनाओं से सरकार की छवि दो कदम आगे और चार कदम पीछे वाली बन गई।

शुरुआती दिनों में विधायकों को गाड़ी खरीदने की सुविधा देने का ऐलान और फिर फैसला वापस लेने की घोषणा जैसी चीजों का दुहराव कई बार हुआ। जानकार बताते हैं कि इन योजनाओं में ज्यादातर ऐसी थीं जो भारी-भरकम बजट वाली थीं।

अगर सरकार इनसे पिंड न छुड़ाती तो एक्सप्रेस-वे व लखनऊ मेट्रो जैसी योजनाएं जमीन पर न उतर पातीं। पर सरकार अपने चुनावी वादों से जुड़ी घोषणाओं पर अमल पर आगे-पीछे होने के लिए अक्सर विपक्ष को ही जिम्मेदार ठहराती रही जिसका उसे कोई बड़ा फायदा नजर नहीं आया।
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विकास के साथ छवि बदलने की छटपटाहट भी

सरकार की मुस्लिम तुष्टीकरण की छवि को बदलने के लिए भी कई कदम उठाए गए। मसलन सूबे के मान सरोवर यात्रियों को अनुदान देने की पहल की गई। बुजुर्गों को मुफ्त हरिद्वार व ऋषिकेश तीर्थ यात्रा की पहल की गई।

सरकार का तीन साल पूरा होने की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री इन तीर्थ यात्रियों के पहले जत्थे को यात्रा पर रवाना करेंगे। हिंदुओं की आस्था से जुड़े अयोध्या, मथुरा व काशी जैसे धार्मिक स्थलों के विकास के लिए भी बड़े पैमाने पर विकास योजनाओं का ऐलान भी किया गया।
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