यूपी स्टेट कंस्ट्रक्शन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलेपमेंट कॉर्पोरेशन (यूपी सिडको) के मुख्य अभियंता (पश्चिम) के पद पर तैनात कृष्ण कांत शर्मा समेत दो अन्य अभियंताओं को वित्तीय अनियमितता के मामले में निलंबित कर दिया गया है। इनमें झांसी में तैनात प्रभारी अधीक्षण अभियंता विनोद चंद्र पांडेय और गाजियाबाद में तैनात सहायक अभियंता (विद्युत) वासुदेव तिवारी भी शामिल हैं। इन तीनों अभियंताओं पर बिना काम कराए ही कार्यदायी संस्था को 4 करोड़ 80 लाख रुपये का भुगतान करने का आरोप है। यूपी सिडको के प्रबंध निदेशक शिव प्रसाद ने तीनों के निलंबन का आदेश जारी कर दिया है।
इनके अलावा रिटायर हो चुके तत्कालीन अधिशासी अभियंता एके गोयल व कालिका प्रसाद और सहायक अभियंता एसके अवस्थी से रिकवरी कराने और तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए गए हैं। साथ ही दो कार्यदायी संस्थाओं मेसर्स राज कंस्ट्रक्शन कंपनी और मेसर्स अमरजीत इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. की सिक्योरिटी राशि जब्त करने और दोनों कंपनियों पर एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रबंध निदेशक के आदेशानुसार मुख्य अभियंता कृष्णकांत शर्मा के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने के साथ ही उन्हें यूपी सिडको मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। जबकि प्रभारी अधीक्षण अभियंता विनोद चंद्र पांडेय और सहायक अभियंता वासुदेव तिवारी के खिलाफ विभागीय जांच करने के लिए प्रयागराज के अधीक्षण अभियंता शैलेंद्र कुमार निगम को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। दोनों अभियंताओं को अधीक्षण अभियंता प्रयागराज के कार्यालय से संबद्ध किया गया है।
यह है मामला
महाराष्ट्र के महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय ने यूपी सिडको को करीब 100 करोड़ का निर्माण कार्य दिया था। यह कार्य वर्ष 2009 से 16 के बीच कराया गया था। पहले चरण में अभियंताओं ने निविदा के अनुबंध शर्तों को ताक पर रखकर कार्यदायी संस्थाओं को बिना कराए ही 4.80 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया। इसके लिए विवि के स्तर बिल भी पास नहीं कराया गया। इसकी शिकायत मिलने पर प्रारंभिक जांच कराई गई। इसमें शिकायत सही पाई गई थी।