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UP: भ्रष्टाचार के आरोप में कानपुर के एसीएमओ सहित तीन चिकित्सक निलंबित, घूसखोरी के आरोप में डॉक्टर पर गिरी गाज

Thu, 24 Jul 2025 09:44 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

भ्रष्टाचार के आरोप में कानपुर के एसीएमओ सहित तीन चिकित्सक निलंबित किए गए हैं। मेडिकल जांच के नाम पर घूसखोरी के आरोप में डॉक्टर पर गाज गिरी है। उपमुख्यमंत्री के निर्देश पर अलग-अलग मामलों में आधा दर्जन डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। 
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उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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भ्रष्टाचार के आरोप में कानपुर नगर के अपर मुख्य चिकित्साधिकारी (एसीएमओ) और मेडिकल जांच में हेराफेरी के आरोप में दो अन्य डॉक्टर को निलंबित कर दिया गया है। अलग-अलग मामले में तीन अन्य डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है। यह कार्रवाई उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देश पर हुई है।

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कानपुर में एसीएमओ के रूप में कार्यरत डॉ. सुबोध प्रकाश यादव वर्ष 2003 में अलीगढ़ से स्थानांतरित होकर परामर्शदाता के पद पर आए थे। वर्ष 2019 में उन्हें लेवल-4 में पदोन्नति मिली। इसके बावजूद उनका स्थानांतरण नहीं हुआ। आरोप है कि डॉ. सुबोध ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए विभिन्न आपूर्तिदाताओं से साठगांठ कर वित्तीय अनियमितता को बढ़ावा दिया। 

विभागीय कार्रवाई शुरू करने का आदेश

नवंबर 2024 में डॉ. सुबोध ने चीफ फार्मासिस्ट अवनीश कुमार शुक्ला, डॉ. वन्दन सिंह, वरिष्ठ वित्त एवं लेखाधिकारी के साथ मिलकर अपने पद का दुरुप्रयोग किया। मामले में मुख्य चिकित्साधिकारी स्तर से जांच कराने पर आरोप सही पाई गई। जांच में दोषी पाए जाने पर विभाग व सरकार छवि धूमिल करने के आरोप में डॉ. सुबोध प्रकाश यादव को निलंबित कर दिया गया है। आरोपी चीफ फार्मासिस्ट एवं वरिष्ठ वित्त एवं लेखाधिकारी के विरुद्ध भी विभागीय कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया गया है।

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सीबीआई भी कर चुकी है जांच

यह भी आरोप है कि सीबीआई की चार्जशीट में दोषी पाई गई कानपुर नगर के आचार्य नगर निवासी जेएम फर्मा से मिलीभगत की गई। जेम पोर्टल और अन्य अभिलेखों में हेराफेरी करके अधोमानक सामग्री खरीदी गई। इसमें पाया गया था कि हेराफेरी के जरिए करीब 1.60 करोड़ से अधिक का भुगतान किया गया था।

मेडिकल जांच में घूसखोरी, दो डॉक्टर निलंबित

मथुरा में उत्तर प्रदेश पुलिस आरक्षी भर्ती प्रकिया में गठित मेडिकल पैनल के सदस्यों पर घूस मांगने के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप हैं कि टीम के डॉक्टर सदस्यों ने मेडिकल परीक्षण पास कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से रुपये वसूले। इस आरोप में जिला चिकित्सालय में तैनात आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. हरि नारायण प्रभाकर, एटा के जिला चिकित्सालय में तैनात डॉ. राहुल वार्ष्णेय को निलंबित कर दिया गया है। इनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
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आशा चयन में सीएमओ ने की अनियमितता

बदायूं जिला चिकित्सालय में तैनात डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बांदा मुख्य चिकित्साधिकारी पद पर रहते हुए आशा चयन प्रकिया में अनियमितता बरती। वित्तीय भ्रष्टाचार के गंभीर शिकायतों का मामला विधानसभा में उठा था। मामले की जांच कराई गई। चित्रकूटधाम मंडल के मंडलीय अपर निदेशक की जांच में डॉ. श्रीवास्तव को दोषी पाया गया। ऐसे में उप मुख्यमंत्री ने निर्दे दिया है कि डॉ. श्रीवास्तव के विरूद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू की जाए। 

उच्चादेशों की अवहेलना की बात सही पाई गई

इसी तरह जनता दर्शन के दौरन उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक को वीरांगना अवन्तीबाई महिला चिकित्सालय (डफरिन) की कई शिकायतें मिली थीं। उप मुख्यमंत्री ने लखनऊ में मंडलीय अपर निदेशक से जांच कराई, जिसमें कई अनियमितता एवं उच्चादेशों की अवहेलना की बात सही पाई गई। ऐसे में अस्पताल की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रेनू पंत को आरोप पत्र देकर विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। 

विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है

उधर, हमीरपुर जिला चिकित्सालय में तैनात नेत्र सर्जन डॉ. अनिल कुमार सिंह पर रोगियों के उपचार में लापरवाही के आरोप लगे हैं। कर्तव्यों एवं दायित्वों के प्रति उदासीनता बरतने के संबंध में आई शिकायतों को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया। डॉ. अनिल कुमार सिह ने स्पष्टीकरण नहीं दिया। ऐसे में उनके खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। सीतापुर में फर्श पर प्रसूता व नवजात शिशु के लेटे जाने का वीडियो सोशल मीडिया में वॉयरल हुआ है। उप मुख्यमंत्री ने पूरे मामले में जांच करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई क निर्देश दिया है।
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