स्वाति सिंह परमार ने ‘यूज ऑफ लॉ इन इंटरनेशनल पीस कीपिंग’ विषय पर कहा कि सरकार को शांति की ऑन-दी-स्पॉट कार्रवाई के बारे में सोचना चाहिए। इवेबिनार में लगभग 400 विद्यार्थियों, अध्यापकों, विधि पेशेवरों तथा अनुसंधान एवं पीएचडी स्कॉलर आदि ने भाग लिया।
आयोजन सचिव विधि संकाय विवि के प्रो मोहम्मद अहमद ने विचार रखे। वेबिनार में विधि संकाय विवि के छात्र अध्यक्ष सक्षम अग्रवाल, छात्र संयोजक सचिन वर्मा, छात्र सह-संयोजक विनय यादव तथा दिव्यांशु चतुर्वेदी, छात्र समन्वयक शिशिर यादव तथा शिखर सिंह ने प्रमुख भूमिका निभाई।
प्लेग फैलने के बाद यूरोपियन देशों की ओर से पहली बार आइसोलेशन से जुड़े नियम बनाए गए। उसके बाद सार्स, इबोला, इन्फ्लूएंजा जैसी कई महामारियों के मद्देनजर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 2005 में विश्व स्वास्थ्य कानून बनाया ताकि ऐसी बीमारियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलने से रोका जा सके।
यह जानकारी कोलंबो विवि की प्रो. जीवा निरेला ने बीबीएयू में हुए वेबिनार में दी। बीबीएयू के सेंटर ऑफ पोस्टग्रेजुएट लीगल स्टडीज और डिपार्टमेंट ऑफ ह्यूमन राइट्स के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय वेबिनार का विषय- ‘क्वारंटीन एंड प्रीवेंशन ऑफ डिजीज : इंटरनेशनल एंड कंपैरेटिव लॉ पर्सपेक्टिव’ था।
वेबिनार के संरक्षक और बीबीएयू कुलपति आचार्य संजय सिंह ने कोविड-19 से बचाव के लिए योग, मेडिटेशन और प्राणायाम की सलाह दी। बताया कि हल्दी, अदरक, लहसुन, धनिया जैसे मसाले इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार होते हैं।
हम इम्युनिटी बढ़ा कर ही कोरोना से लड़ सकते हैं। सेंटर ऑफ पोस्टग्रेजुएट लीगल स्टडीज की डायरेक्टर और वेबिनार की निर्र्देशक प्रो. प्रीति सक्सेना ने एपिडेमिक डिजीज एक्ट की जानकारी देते हुए बताया कि यह एक्ट 22 अप्रैल 2020 को संशोधित किया गया है।
वेबिनार की सह-निर्देशक प्रो. प्रीति मिश्रा ने प्रो. जीवा की अकादमिक उपलब्धियों की जानकारी दी। डॉ. सूफिया अहमद ने कोरोना के दौरान महिलाओं और फ्रंट लाइन हेल्थ वर्कर्स की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर चर्चा की।
डॉ. शशि कुमार ने विभिन्न देशों में ऐसी संक्रामक बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए बनाए गए कानूनों के बारे में बताया। डॉ. राशिदा अतहर ने सभी को धन्यवाद दिया।