प्रभारी निरीक्षक अलीगंज फरीद अहमद के मुताबिक तीनों शातिर पढे़-लिखे और तकनीकी जानकार है। पूछताछ में बताया कि लूटे पर्स से मोबाइल, एटीएम कार्ड व नकदी मिलती था। रुपये तत्काल खर्च कर मोबाइल का सिम निकालकर अपने मोबाइल में डाल लेते थे।
इसके बाद एटीएम का ओटीपी हासिल कर कार्डलेस बैंकिंग का इस्तेमाल करते थे। इस तरीके से खाताधारक को रकम निकाले जाने की सूचना मेसेज से नहीं मिल पाती। जब वह खाते का स्टेटमेंट निकालता तो जानकारी होती।
कार्डलेस बैंकिंग में जो ओटीपी जनरेट किया जाता है, वहीं एटीएम का पिनकोड हो जाता है। ओटीपी व पिनकोड हासिल करने के बाद मोबाइल नाले में फेंक देते थे, ताकि किसी को पता न चल सके।
एसीपी अलीगंज राजकुमार शुक्ला के मुताबिक आशय पर जानकीपुरम, हसनगंज, महानगर, अलीगंज, मड़ियांव में 15 केस हैं। शेखर वर्मा पर अलीगंज, जानकीपुरम, मड़ियांव व महानगर में सात और आशीष पर अलीगंज में दो केस हैं।
खुलासा करने में एआई गोपाल जी, ओमप्रकाश यादव, शैलेंद्र सिंह सेंगर, धनंजय तिवारी, चंद्रकांत, महिला एसआई अनुपम पॉल, कांस्टेबल विवेक कुमार, उस्मान, बबलू शर्मा, सत्यप्रकाश, अमित यादव, मो. नदीम, मानवेंद्र गुर्जर व विश्वजीत सिंह की भूमिका रही।