पुलिस के मुताबिक, रोमानियाई जालसाजों का गिरोह पिछले साल भी राजधानी में अप्रैल-मई में खातों से रकम उड़ा चुका है। तब गिरोह के सदस्य नाका थानाक्षेत्र के एक होटल में ठहरे थे। मार्निंग वॉक के बहाने एटीएम बूथ पर चिप, कैमरा और स्किमर लगाते थे। इसके बाद दिनभर होटल के कमरे में डाटा जुटाते थे। देर रात कुछ एटीएम कार्ड के क्लोन तैयार कर रकम निकालते थे। इसकी भनक लगने पर पुलिस ने छानबीन की तो गिरोह के सदस्य दिल्ली निकल गए। पुलिस ने दिल्ली तक पीछा किया तो गिरोह टर्की भाग निकला था।
हवाला के जरिए दूसरे देश मंगाते थे रकम
साइबर सेल की टीम के मुताबिक, वीजा की मियाद खत्म होने के बाद वापसी के पहले गिरोह बचे क्लोनिंग कार्ड दूसरे साथियों को दे देते थे। रकम एक देश से दूसरे देश पहुंचाने के लिए गिरोह हवाला का इस्तेमाल करता था। यह रकम जालसाजों को दुबई, टर्की व अन्य आसपास के देशों में उपलब्ध कराई जाती थी। जिसे गिरोह के सदस्य अपने करीबियों के खातों में डालकर निकाल लेते थे। ज्यादातर जालसाजों का गिरोह भारत के बाद टर्की में टूरिस्ट वीजा पर जाता था।
दिल्ली में ऑनलाइन बुक कराते थे गेस्ट हाउस
पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह दिल्ली में ओयो के जरिए ऑन लाइन गेस्ट हाउस महीने भर के लिए सस्ते दाम पर बुक कराता था। इस तरह के ज्यादातर गेस्ट हाउस दिल्ली के मेहरौली, साकेत इलाके में हैं। गिरोह के सदस्य सिर्फ दो बार ही कमरे से निकलते थे।