उत्तर प्रदेश कंस्ट्रक्शन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपी सिडको) में उच्चस्तर पर पदोन्नतियों में जबरदस्त गड़बड़ियां सामने आईं हैं। ऐसे तीन इंजीनियरों को पदोन्नति दे दी गई है जिन पर अनियमितताओं के कई आरोप हैं और वे जांच के घेरे में हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने लखनऊ के कमिश्नर को जांच सौंपी है। उन्हें एक माह के भीतर रिपोर्ट देनी होगी।
मालूम हो कि कुछ समय पहले यूपी सिडको में मुख्य अभियंता के कुछ पदों पर पदोन्नति दी गई है। ये पद इसलिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि निर्माण समेत सभी प्रमुख कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी उन्हीं की होती है।
शासन से की गई शिकायत में कहा गया है कि एक ऐसे इंजीनियर को भी मुख्य अभियंता बना दिया गया है, जिसके खिलाफ ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के गंभीर आरोप में सतर्कता जांच चल रही है। नियमानुसार, डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी (डीपीसी) के लिए उनका नाम विचार करने के अयोग्य था।
पदोन्नति पाने वाले एक अन्य इंजीनियर की वर्ष 2014-15 और 2015-16 की वार्षिक गोपनीय प्रवष्टि (एसीआर) में प्रपत्र संदिग्ध की श्रेणी में रखे गए हैं। वह कई बार निलंबित हो चुके हैं। कार्यों की गुणवत्ता की जांच अभी लंबित है।
वहीं एक इंजीनियर को तो किसी भी एसीआर में उत्कृष्ट नहीं दिया गया है। फिर भी डीपीसी में उनका नाम वरीयता सूची में काफी ऊपर रखा गया। इस तरह से इन पदोन्नतियों में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
प्रमुख सचिव, समाज कल्याण मनोज कुमार सिंह ने स्वीकार किया कि ऐसी शिकायत मिली है और जांच लखनऊ के कमिश्नर को सौंप दी गई है। उनकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।