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प्रधानमंत्री सिलाई योजना के नाम पर ठगी, तीन गिरफ्तार

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लखनऊ। ग्रामीण महिला कल्याण एवं प्रधानमंत्री सिलाई मशीन योजना के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश चिनहट पुलिस ने किया है। इस गिरोह के तीन सदस्यों को पुलिस ने दबोच लिया है। उनके पास से कई फर्जी दस्तावेज, प्रमाण पत्र, मुहरें और परिचय पत्र बरामद किया है। पुलिस ने तीनों आरोपियों को जेल भेज दिया है।
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प्रभारी निरीक्षक चिनहट धनंजय पांडेय के मुताबिक, कमता के शिवपुरी कॉलोनी में तीन लोगों ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर संस्था खोली। इसकी जानकारी होने पर असली संस्था के लोगों ने थाने में शिकायत की। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की। पड़ताल में इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसमें मूलरूप से बदायूं के राम नगता निवासी वेद प्रकाश भारती जो राजाजीपुरम गायत्रीनगर में रहते हैं। बरेली के परेवा कुर्मियान का वीरेंद्र गंगवार और बिहार के गोपालगंज स्थित हलवार पिपरा निवासी राज प्रताप सिंह शामिल हैं। तीनों ने ग्रामीण महिला संस्था एवं प्रधानमंत्री सिलाई योजना के नाम पर फर्जी रजिस्ट्रेशन व कूटरचित दस्तावेजों के आधार संस्था खोली। इस योजना के तहत लाभ और नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से रुपये वसूलने शुरू कर दिए। मोटी रकम हासिल करने के बाद अचानक से कार्यालय बंद कर फरार हो गए।
संस्थाओं के निदेशक व अध्यक्ष बन मिलते थे जालसाज
प्रभारी निरीक्षक धनंजय पांडेय केमुताबिक, पकड़े गए जालसाजों ने कुबूल किया है कि वह लोगों से मिलने के लिए अलग-अलग संस्थाओं के निदेशक, सचिव और अध्यक्ष बनते थे। उन्हें कई लाभकारी योजनाओं के बारे में जानकारी देते। इसके बाद निवेश कराने के नाम पर रुपये हड़प लेते। लोगों को भरोसे में रखने के लिए फर्जी तरीके से पहचान पत्र, संस्थाओं और योजनाओं के हैंडबिल, कूटरचित रजिस्ट्रेशन पत्र व वैनर का प्रयोग करते थे। इस गिरोह ने लखनऊ के अलावा अलीगढ़, फर्रूखाबाद, शाहजहापुर, बहराइच सहित करीब 17 जिलों में फर्जी कार्यालय खोलकर ठगी कर चुके हैं।
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ये दस्तावेज हुए बरामद
पुलिस के मुताबिक, जालसाजों के पास से ग्रामीण महिला संस्था प्रधानमंत्री सिलाई योजना के फर्जी दस्तावेज (खाली पत्र 48 और भरे हुए 49), 25 फॉर्म उत्तर प्रदेश भवन व निर्माण बोर्ड, सोनू ग्रामोत्थान कल्याण संस्थान में टीचर के फॉर्म 8, भारतीय जन औषधि परियोजना के 149 फॉर्म, ग्रामीण महिला कल्याण के 73 फार्म, एक बुकलेट, फर्जी कूटरचित रजिस्ट्रेशन सर्टीफिकेट, मुहरें, पहचान पत्र, 5 मोबाइल बरामद किया गया। जालसाजों को दबोचने में एसएसआई उमाशंकर यादव, एसआई लोकेश गौतम, कांस्टेबल अरुण प्रताप सिंह, आनंद कुमार सिंह, हितेश सिंह और आकाश यादव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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