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मिट् टी उठाने के विवाद में हुआ था बिल्डर पर हमला, तीन शूटर दबोचे

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मिट्टी उठाने के विवाद में हुआ था बसपा के पूर्व एमएलसी के करीबी बिल्डर पर हमला, दो शूटर समेत तीन दबोचे
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पीजीआई थानाक्षेत्र की अंसल सिटी में शनिवार सुबह बसपा के पूर्व एमएलसी रामू द्विवेदी के करीबी बिल्डर सुनील सिंह पर जानलेवा हमले का खुलासा करते हुए पुलिस ने दो शूटर समेत तीन बदमाशों को दबोच लिया।
एसएसपी कलानिधि नैथानी का दावा है कि बिल्डर पर हमला मिट्टी उठाने के विवाद में उसके ही परिचित व पूर्व साझेदार हरदोई के आशीष सिंह ने कराया था।
उन्होंने बताया कि हमले में आशीष समेत पांच लोग शामिल थे, जिनमें से हरदोई के संजय उर्फ टिल्लू, मो. अशफाक और अमरेंद्र सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है।
उनके पास से एक पिस्टल, एक तमंचा व वारदात में इस्तेमाल एसयूवी बरामद हुई है। आशीष और उसका साथी आदित्य नारायण उर्फ गुड्डू फरार हैं। उनकी तलाश में पुलिस की टीमें दबिश दे रही हैं।
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एसएसपी ने बताया कि अंसल सिटी निवासी सुनील सिंह और आशीष सिंह करीब दो साल पहले एक साथ मिट्टी उठाने का काम करते थे।
आशीष यहां गोमतीनगर में सरयू अपार्टमेंट के पीछे अपने दूसरे घर पर रहता है। दोनों के बीच रुपयों के लेन-देन को लेकर तनातनी हुई, जिसके बाद वह अलग हो गए।
आशीष को शक था कि सुनील ने मिट्टी के काम के एवज में उसका 30 से 40 लाख रुपया दबा लिया है। इसी वजह से वह सुनील से खुन्नस रखने लगा।
बकौल एसएसपी, बदला लेने की भावना और मिट्टी के काम में वर्चस्व स्थापित करने के लिए उसने करीब दो महीने पहले सुनील को रास्ते से हटाने के लिए हरदोई के कछौना बालामऊ स्थित तिलकनगर निवासी अमरेंद्र सिंह से संपर्क किया।
अमरेंद्र करीब दो साल से यहां आईआईएम रोड पर मुबारकपुर में अपना मकान बनवाकर परिवार के साथ रह रहा है।
आशीष ने अमरेंद्र के अलावा कछौना बालामऊ की नई कॉलोनी निवासी मो. अशफाक कछौना के काशीनगर पतसैनी में रहने वाले संजय उर्फ टिल्लू तथा तेरवां गांव के आदित्य नारायण उर्फ गुड्डू के साथ मिलकर सुनील की हत्या की साजिश रची।
लगभग एक सप्ताह तक सुनील सिंह की रेकी करने के बाद शनिवार सुबह उसे घर से निकलते ही घेरकर गोलियां मार दी गईं।
एसएसपी ने बताया कि बुधवार सुबह क्राइम ब्रांच, स्वॉट और सर्विलांस की मदद से अमरेंद्र की लोकेशन उतरेठिया क्रॉसिंग पर मिली थी।
उसे घेरकर पकड़ा गया, जिसके बाद वारदात की कड़ियां खुल गईं। अमरेंद्र सिंह मुख्य आरोपी आशीष सिंह का मददगार था और हरदोई से शूटर लेकर उसके घर पहुंचा था।
उससे पूछताछ के बाद पुलिस टीम ने संजय और अशफाक को दबोच लिया। मुख्य आरोपी आशीष सिंह वारदात के बाद से ही मोबाइल फोन बंद करके गायब है।
अंसल सिटी में डेढ़ घंटे से टहल रहे थे बदमाश
क्षेत्राधिकारी कैंट दुर्गेश कुमार सिंह ने बताया कि सुनील को घेरने के लिए शूटर संजय उर्फ टिल्लू, आदित्य उर्फ गुड्डू और अशफाक करीब डेढ़ घंटे तक अंसल सिटी में ही टहल रहे थे। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को संजय उर्फ टिल्लू, आदित्य उर्फ गुड्डू और मो. अशफाक हरदोई से लखनऊ पहुंचे। अमरेंद्र अपनी कार से उन्हें लेकर आशीष के सरयू अपार्टमेंट के पीछे स्थित घर पहुंचा। वहां आशीष ने संजय और आदित्य को पिस्टल व तमंचा दिया। आदित्य ने हाल ही में एक सेकंड हैंड बाइक खरीदी थी। तय हुआ कि उसी बाइक से वारदात की जाएगी। शनिवार सुबह आदित्य बाइक से आशीष के घर पहुंच गया। अमरेंद्र और अन्य शूटर भी वहां आ गए। इसके बाद अमरेंद्र दो लोगों को अपनी कार से लेकर शहीद पथ पहुंचा। आदित्य एक अन्य के साथ बाइक से पीछे-पीछे चल रहा था। अमरेंद्र का कहना है कि सुनील के घर का रास्ता दिखाने के बाद वह आशीष को लेकर लौट गया। संजय, आदित्य और अशफाक करीब डेढ़ घंटे तक बाइक से अंसल सिटी में ही सुनील का इंतजार करते रहे। पुलिस का कहना है कि आशीष सुबह से ही सुनील से फोन कर बातचीत कर रहा था। इस दौरान ही सुनील ने साइट पर जाने की जानकारी दी, जिसके बाद उसने शूटरों को अलर्ट कर दिया।
रणनीति के तहत शूटरों का फोटो वायरल किया
सुनील पर जानलेवा हमले के दूसरे दिन शूटरों का एक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। फुटेज में शूटरों का चेहरा साफ दिख रहा था। बाइक में बैठे शूटर के सिर पर कम बाल थे। यह फोटो आदित्य नारायण उर्फ गुड्डू का है और उसकी आसानी से पहचान हो रही थी। पहले पुलिस अधिकारी कहते रहे कि यह फोटो सुनील सिंह पर हमले से संबंधित नहीं है बल्कि हजरतगंज में मुख्तार अंसारी के प्रतिनिधि शाहिद और उसके भाई नामवर पर गोली चलाने वाले बदमाशों का है। एसएसपी ने बताया कि आदित्य उर्फ गुड्डू का राजधानी में कई लोगों से संपर्क है। इसलिए फुटेज से उसके सतर्क होने या अंडरग्राउंड होने की आशंका पैदा हो गई। इससे खुलासे में बाधा आ सकती थी। इसलिए रणनीति के तहत फुटेज को हजरतगंज में हुई वारदात से जोड़कर दोबारा सोशल मीडिया पर वायरल कराया गया। इससे शूटर निश्चिंत हो गए और पुलिस के जाल में फंस गए।
पूर्व एमएलसी के रिश्तेदार से वसूली के आरोप में घिरी क्राइम ब्रांच
सुनील सिंह पर हमले के पीछे पहला शक बसपा के पूर्व एमएलसी रामू द्विवेदी के रिश्तेदार व गोमती एस्टेट में उसके साझेदार रहे राजेश पांडेय पर आया था। दोनों के बीच लेन-देन को लेकर विवाद चल रहा था। हमले के बाद पूर्व एमएलसी के साथ राजेश पांडेय ट्रॉमा सेंटर पहुंचा था, जहां से पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। इसके बाद चार दिन तक क्राइम ब्रांच की टीम उसे विभिन्न थानों में रखकर पूछताछ करती रही। राजेश के पारिवारिक सूत्रों का कहना है कि वह रीयल एस्टेट का बड़ा कारोबारी है और आर्थिक रूप से काफी सक्षम है। क्राइम ब्रांच के लिए यह केस किसी लॉटरी की तरह था। पुलिस सूत्रों ने बताया कि राजेश के साथ ही कई अन्य रीयल एस्टेट कारोबारियों को उठाकर क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी ने मोटी रकम वसूली।
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अमरेंद्र के भाई ने पुलिस पर लगाया फंसाने का आरोप
वारदात के खुलासे की प्रेस कांफ्रेंस के बाद एसएसपी के बंगले पर पहुंचे अमरेंद्र के भाई रामेंद्र ने पुलिस पर फर्जी मामले में फंसाने का आरोप लगाया। रामेंद्र का कहना है कि अमरेंद्र व्यापारी है और उसका अपराध से कोई लेना-देना नहीं है। आज तक उसके खिलाफ कोई मुकदमा तक नहीं दर्ज है। वह बालामऊ व्यापार मंडल का अध्यक्ष भी रह चुका है। उसने बताया कि जिस दिन आशीष हमले की बात कही जा रही है, उस दिन वह बालामऊ में ही था। शुक्रवार को बालामऊ में उसके घर के पास कथा का आयोजन था जिसमें शामिल होने के लिए अमरेंद्र हरदोई आया था। शनिवार सुबह कथा खत्म होने तक वह हरदोई में ही रहा। उसने बताया कि पुलिस ने देर रात आईआईएम रोड स्थित घर पर दबिश देकर भाभी को नजरबंद कर दिया और अमरेंद्र को उठा ले गई। रामेंद्र के मुताबिक वह कथा में भाई की मौजूदगी के साक्ष्य लेकर आला अधिकारियों से पुलिस के फर्जी गुडवर्क की शिकायत करेगा।
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