लखनऊ। लखीमपुर से जब इंटरमीडिएट करने के बाद लखनऊ विवि पहुंचा तो सोचा सीधा बीए कर लूं। पिताजी डॉक्टर थे तो उनका मानना था कि आर्ट्स साइड लेना इस बात का रुझान है कि पढ़ने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं है। तो उनके कहने पर बीकॉम कर लिया। इसके बाद एमकॉम करने के लिए फॉर्म भरा पर पता नहीं क्यों विधि में दाखिला ले लिया। बोले, सोचा एमकॉम करने का था और एडमिशन लॉ में हो गया।
ये बातें इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस राजेश सिंह ने सोमवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के 104वें स्थापना दिवस समारोह में सम्मानित होने के बाद कहीं। वे अपने छात्र जीवन के अनुभव बयां कर रहे थे। इस दौरान सभागार में उनकी पत्नी भी मौजूद थीं। उन्होंने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने में उनकी पत्नी का बड़ा योगदान रहा।
स्थापना दिवस के अवसर पर छह पूर्व छात्रों को सम्मानित किया गया। इसमें प्रो. प्रमोद टंडन, धनंजय सिंह, मुकेश शर्मा, लीना जौहरी और जस्टिस राजेश सिंह शामिल रहे। कार्यक्रम में कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने कहा कि मंच पर उनके साथ मौजूद विवि के पूर्व छात्र अपने-अपने क्षेत्र में बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं। नीचे कुर्सियों पर बैठी नई पीढ़ी अपने वरिष्ठों से बहुत सीखने के लिए आशान्वित है। वह भी उनके जैसा बनने की प्रेरणा लें।
शोध व नवाचार में नई बुलंदियां छू रहा विवि
कुलपति ने कहा कि विवि शोध और नवाचार में नई बुलंदियों को छू रहा है। उसी की देन है सत्र 2024-25 में विवि में 67 देशों के 1800 अंतरराष्ट्रीय छात्रों ने पढ़ाई के लिए आवेदन किया। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय छात्रों का है, छात्रों के लिए है और शिक्षकों द्वारा चलाया जा रहा है। कुलपति ने इस बात पर जोर दिया कि पूर्व छात्र वर्तमान छात्रों के लिए आदर्श होते हैं।
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लखनऊ और लविवि कभी नहीं होगा दूर
मैं उन खुशनसीबों में से एक हूं जिनके हिस्से अवध की शाम और बनारस की सुबह आई है। लखनऊ और लविवि मेरे दिल के हमेशा करीब रहेगा। विवि से बीकॉम करने के बाद केनरा बैंक में नौकरी लग गई। दिल नहीं माना तो नौकरी छोड़कर पत्रकार बना। फिर कई संस्थानों में काम करने और सीखने का मौका मिला। मैं अपने को खालिस लखनऊ का मानता हूं, इस जैसा शहर दूसरा नहीं है।
अजय सिंह, राष्ट्रपति के प्रेस सचिव
खुराफात की तो नहीं, लेकिन देखी खूब
लखनऊ विश्वविद्यालय में 90 का दशक जुलूसों और छात्र राजनीति का केंद्र था। विवि से कई विषयों में स्नातक किया लेकिन पत्रकार बनूंगा और बीबीसी जैसे बड़े संस्थान को लीड करूंगा, यह नहीं सोचा था। वर्तमान पत्रकारिता में जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीक है, ऐसे में सही खबर पाठक तक पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती है। छात्रसंघ में लोकतंत्र का समर्थक हूं। समय के अनुसार लखनऊ विवि ने खुद को राष्ट्रीय और वैश्विक दोनों स्तरों पर प्रोफेशनल बनाया है। आगे भी क्रम जारी रहे तो विवि दुनिया के नामी संस्थानों में शामिल होगा।
मुकेश शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार- बीबीसी
लखनऊ विवि ने मुझे बड़ा किया
मैंने जीवन के 24 वर्ष लखनऊ विवि में बिताए। यूं कहें कि लविवि ने मुझे बड़ा किया और मैंने अपनी सारी पढ़ाई यहीं से पूरी की। इसका बड़ा कारण था कि मेरे पिता भौतिकी विभाग में शिक्षक थे। उन्हें विवि में भवन आवंटित था। विवि ने सामाजिक स्तर पर देश को बहुत समृद्ध किया। यहां पढ़कर बहुत से लोगों ने अपने क्षेत्र में सफलता का मुकाम पाया। नए छात्रों से कहना चाहता हूं कि वर्तमान में प्रबंधन से लेकर विज्ञान तक के क्षेत्र में तमाम अवसर हैं। वे स्वयं को निखारें और तरक्की के शीर्ष पर स्वयं को स्थापित करें।
धनंजय सिंह, मैनेजिंग डायरेक्टर- मार्क लाइफ साइंसेज, मुंबई
शिक्षकों से मिली पढ़ने की प्रेरणा
बॉटनी विभाग के प्रो. सीपी शर्मा और प्रो. रघुवंशी घर के करीब रहते थे। वह सुबह विवि के लिए निकलते और देर रात घर जाते। उन्हें देखकर सोचा कि स्कूल की पढ़ाई तो छह घंटे में खत्म हो जाती है। अब वहां पढ़ना है जहां पर 16 घंटे शिक्षक पढ़ाते हैं। फिर विवि के वनस्पति विज्ञान विभाग में दाखिला ले लिया। नॉर्थ ईस्ट विश्वविद्यालय में जब कुलपति और शिक्षक के तौर पर सेवाएं दीं तो टिशू कल्चर के ज्ञान को प्रयोग में लाने का काम किया। इसने क्षेत्र के लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव लाने का काम किया।
प्रो. प्रमोद टंडन, पूर्व कुलपति- नॉर्थ ईस्ट विश्वविद्यालय
क्लास बंक करने या मूवी देखने का नहीं सोचा
1989 में एलयू से संबद्ध अवध गर्ल्स डिग्री कॉलेज से अंग्रेजी, अर्थशास्त्र और इतिहास में बीए किया। इसके बाद एलयू से कंपोजिट हिस्ट्री में एमए की डिग्री हासिल की। मध्य कालीन इतिहास के डॉ. घोष हुआ करते थे। डॉ. मुकुल, डॉ. मेहरा, प्रो. कौल ने भी पढ़ाया है। पढ़ने के दौरान मैंने सिविल सेवा की तैयारी का मन बना लिया था। इसलिए कभी मूवी देखने और क्लास बंक करने ख्याल नहीं आया। उस वक्त ऐसा कहा जाता था कि विवि में पढ़ाई नहीं होती है। लेकिन जब मैंने एमए में दाखिला लिया, तो यह मुझे गलत लगा। विवि में एक से बढ़कर एक प्रोफेसर थे, जिनसे काफी कुछ सीखने को मिला।
- लीना जौहरी, प्रमुख सचिव, स्टांप एवं पंजीकरण, महिला कल्याण एवं बाल विकास विभाग