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लखनऊ में डेथ सर्टिफिकेट में खेल फंसा रहा मुआवजे में पेच

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हिमांशु अवस्थी
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डफरिन अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अजीज बीते साल अस्पताल में संक्रमित गर्भवती व बच्चे का इलाज करने के दौरान संक्रमित हुए।
हालत बिगड़ने पर उन्हें पीजीआई में भर्ती कराया गया, जहां 15 जुलाई को उनकी मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन ने परिजनों को मुआवजा राशि दिलाने के लिए सभी कागज तैयार करके स्वास्थ्य महानिदेशालय को भेज दिया।
करीब 11 माह बाद भी मुआवजा राशि नहीं मिल पाई है। पत्नी मुसव्वर रिजवाना का आरोप है कि स्वास्थ्य महानिदेशालय से उन्हें पत्र भेजकर मुआवजा राशि से बाहर कर दिया गया।
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अफसरों ने तर्क दिया कि वह कोविड वार्ड में ड्यूटी नहीं कर रहे थे। ऐसे में मुआवजे की राशि उन्हें नहीं मिल सकती। परिवार आज तक मुआवजा राशि व मृतक आश्रित में नौकरी की आस लिए बैठे हुए हैं।
सिविल अस्पताल के लैब टेक्नीशियन अशोक कुमार गुप्ता बीते साल नवंबर में संक्रमित हुए। तीन दिन तक सिविल में भर्ती रहे।
हालत बिगड़ने पर परिवारीजन उन्हें सहारा अस्पताल ले गए, जहां 29 नवंबर को मौत हो गई। डेथ सर्टिफिकेट में मौत की वजह हार्ट फेल होना दिखाया गया।
कोविड ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले लैब टेक्नीशियन के परिवार को न तो सरकार की तरफ से अभी तक कोई मुआवजा मिला और न ही किसी भी सदस्य को नौकरी।
पत्नी रजनी गुप्ता का आरोप है कि अभी तक उनकी पेंशन तक नहीं मिल पाई है। इसे लेकर परिवारीजनों में आक्रोश है।
सिविल अस्पताल के आर्थोपैडिक सर्जन डॉ. राम किशन कोरोना को मात देकर घर आ गए थे। पोस्ट कोविड के लिए उन्हें दोबारा भर्ती होना पड़ा, जहां कोरोना की दूसरी लहर में उनकी जान चली गई।
डेथ सर्टिफिकेट में मौत की वजह कोरोना नहीं लिखी गया। जबकि समरी में पोस्ट कोविड मौत की वजह बताई गई। मुआवजे के लिए परिवारीजन अभी तक कागजी कार्रवाई नहीं कर पाए हैं।
बेटे सत्येंद्र का आरोप है कि अस्पताल के बाबू ने मुआवजा दिलाने में हाथ खडे़ कर लिए हैं। इनके भी परिवार के किसी भी सदस्य को नौकरी व पेंशन तक नहीं बन पाई है।
यह मामले महज बानगीभर हैं। कोरोना की पहली और दूसरी लहर में कोविड ड्यूटी के दौरान स्वास्थ्य विभाग के कई डॉक्टर और कर्मचारियों की संक्रमित होकर जान चली गई।
किसी की मौत की वजह हार्ट फेल, किडनी फेल, शुगर व अन्य कारणों की वजह से डेथ ऑडिट में दिखाई गई।
अब शासन के जरिए बनाए गए मुआवजे के मानकों को पूरा करने में इन जान गंवाने वालों के परिवारीजनों के पसीने छूट रहे हैं।
वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का कहना है कि कोविड ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले सभी कोरोना योद्धाओं को मुआवजा राशि मिलेगी।
सभी दस्तावेज अस्पताल भेज दिए, पर मुआवजे का इंतजार
रामसागर मिश्रा कोविड अस्पताल के सीएमएस डॉ. वीके सिंह कोरोना से संक्रमित हुए। उन्हें इलाज के लिए पीजीआई में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान 23 मई को उनकी जान चली गई। परिवारीजनों ने मुआवजे के क्लेम के लिए सभी दस्तावेज अस्पताल भेज दिए। अभी तक मुआवजा राशि नहीं मिल पाई है। वह अस्पताल में ही संक्रमित हुए थे। उनके डेथ सर्टिफिकेट में मौत की वजह निमोनिया कोविड दिखाया गया। हालांकि प्रशासनिक पद पर होेने की वजह से उन्हें मुआवजा श्रेणी में शामिल न होने की बात कही जा रही है। हालांकि, अस्पताल प्रशासन उनके परिजनों को मुआवजा राशि दिलाने की पूरी कोशिश में जुटा हुआ है।
अस्पताल से संक्रमित होने का नहीं मिला कोई प्रमाण पत्र
फैजुल्लागंज निवासी शिया कॉलेज में कार्यरत रहे बाबू मो. नासिर अप्रैल में पॉजिटिव हुए। परिजन उन्हें लेकर पुरनिया बंधा रोड स्थित निजी कोविड अस्पताल एवन हॉस्पिटल ले गए, जहां ऑक्सीजन खत्म होने से डिस्चार्ज कर दिया गया। पत्नी इशरत जहां उन्हें भर्ती कराने के लिए भटकती रहीं। आखिर में 24 अप्रैल को इलाज के अभाव में उनकी सांसें थम गईं। परिजनों के पास अस्पताल से कोई भी सुबूत नहीं मिला ताकि साबित कर पाएं कि मो. नासिर पॉजिटिव थे सिवाए कोविड रिपोर्ट के। जबकि कॉलेज में ड्यूटी के दौरान वे संक्रमित हुए थे। परिवारीजनों ने नगर निगम से डेथ सर्टिफिकेट बनवाया। इसमें कोरोना से मौत होने का कोई भी प्रमाण नहीं है।
मुआवजा दिलाने की पूरी कोशिश की जा रही
स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. डीएस नेगी ने बताया कि कोविड ड्यूटी के दौरान संक्रमित होकर जिनकी भी जान गई। उन्हें मुआवजा दिलाने की पूरी कोशिश की जा रही है। करीब 48 लोगों का क्लेम भेजा जा चुका है। पांच लोगों को पैसा भी उनके खाते में आ चुका है। चार लोगों के कागजों में आपत्ति लगी है, उसके निराकरण के लिए विभाग को भेजा गया है। कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद क्लेम भेज दिया जाएगा।
सरकार को तुरंत मुआवजा दिलाना चाहिए
प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ के अध्यक्ष डॉ. सचिन वैश्य ने बताया कि जो भी चिकित्सक कोरोना से जुडे़ हुए हैं और फ्रंट लाइन वर्कर थे। सरकार को उन्हें तुरंत मुआवजे की राशि दिलाना चाहिए। इसमें कतई भी देरी नहीं होनी चाहिए।
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मुआवजे के लिए यह मांगी जा रही डिटेल
मरीज का आईडी प्रूफ, लाभार्थी का आईडी प्रमाण, मृतक से संबंध होेने का प्रमाण, बैंक की सभी डिटेल, हॉस्पिटल से जारी डेथ सर्टिफिकेट, नगर निगम से जारी मृत्यु प्रमाण पत्र, कोविड पॉजिटिव की रिपोर्ट, जिस संस्थान में कार्यरत डॉक्टर व स्टाफ का सेवा प्रमाण पत्र।
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