लखनऊ। कामकाज को पारदर्शी बनाने के लिए नगर निगम में दो वर्ष से ई ऑफिस सिस्टम लागू किया जा रहा है, मगर अब तक यह पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया है। शासन ने इसपर गंभीर रुख अपनाया है। अब उन अधिकारियों का वेतन रोका जाएगा जो ई ऑफिस सिस्टम का उपयोग नहीं करेंगे। शासन ने इसका आदेश भी जारी कर दिया है। साथ में एक रिपोर्ट भेजी है जिसमें यह बताया गया है कि किस विभाग ने कितने लोगों ने ई ऑफिस का उपयोग किया और कितनों ने नहीं।
नगर निगम में करीब दो वर्ष से ई ऑफिस सिस्टम शुरू करने पर कवायद हो रही है, मगर फर्जीवाड़ा करने वाले अपने फायदे के लिए इसे पूरी तरह से लागू ही नहीं होने दे रहे हैं। अप्रैल 2025 से अब तक करीब 150 करोड़ रुपये से अधिक की लागत के विकास कार्यों की फाइलें मैनुअल ही चली हैं। इसके लिए ई ऑफिस सिस्टम का उपयोग नहीं किया गया। मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद प्रमुख सचिव संजय प्रसाद ने नगर विकास विभाग सहित 32 विभागों का सख्त नोटिस जारी किया है। इसमें कहा गया है कि जो कर्मचारी ई ऑफिस से काम नहीं करते उनको वेतन न जारी किया जाए। आदेश का पालन न करने पर वेतन जारी करने वाले अधिकारी और संबंधित विभागाध्यक्ष को जिम्मेदार माना जाएगा।
फर्जीवाड़ा करने की नहीं रहती गुंजाइश
नगर निगम में 15 जुलाई 2024 से ई ऑफिस की शुरुआत जोर शोर से की गई थी। ई ऑफिस के नाम पर अफसरों ने अपने चहेतों को कार्यदायी संस्था के जरिये कंप्यूटर ऑपरेटर पद तैनाती भी दिला दी। नए कंप्यूटर भी खरीदे गए मगर ई ऑफिस पर काम नहीं किया गया। जानकार बताते हैं कि ई ऑफिस सिस्टम में कोई अधिकारी, कर्मचारी बैक डेट में फाइल पास नहीं कर सकता। फाइल किस स्तर पर लंबित है, इसकी जानकारी भी अधिकारी को मिलती रहती है। ऐसे में फर्जीवाड़ा करने की गुंजाइश खत्म हो जाती है और अंदर के लोग इस पर काम करने से बचते हैं।
ये विभाग भी ई ऑफिस के उपयोग में फिसड्डी
चिकित्सा शिक्षा, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, आवास एवं शहरी नियोजन, पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन, व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास, महिला एवं बाल विकास, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, सिंचाई एवं जल संसाधन, लोक निर्माण, पंचायती राज, वित्त, पशुधन, समाज कल्याण व आबकारी।
ई ऑफिस के हैं इतने फायदे
0 कोई अधिकारी-कर्मचारी फाइल को दबा नहीं सकता है। यदि कोई करेगा तो अधिकारी यह पता कर सकेगा कि फाइल कहां पर है।
0 फाइल पर की गई नोटिंग को अनधिकृत कर्मचारी व अधिकारी न तो डिलीट कर सकते हैं और न उसमें बदलाव कर सकता है।
0 फाइल ऑनलाइन उपलब्ध रहने से उसके गायब होने या खो जाने की कोई गुंजाइश नहीं रहती।
0 फाइल पर अधिकारी के डिजिटल हस्ताक्षर होते हैं। कोई दूसरा व्यक्ति जाली डिजिटल हस्ताक्षर नहीं बना सकता।
0 हर स्तर पर फाइल को आगे बढ़ाने का समय तय है। यदि कोई फाइल रोकता है तो उसकी जानकारी उच्चाधिकारी को मिल जाएगी।
ई ऑफिस का कर्मचारी उपयोग कर रहे हैं, मगर बीच-बीच में लापरवाही करते हैं। अब सबको चेतावनी दी गई है कि यदि लापरवाही करेगा तो जिम्मेदारी तय कर वेतन रोक दिया जाएगा। शासन का जो आदेश है उस पर अमल होगा।
-ललित कुमार,
अपर नगर आयुक्त