प्रमुख सचिव श्रम डॉ. एमके शन्मुगा सुंदरम ने उद्यमी संगठनों के साथ बैठक की।
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14 से 18 वर्ष तक के किशोर व युवा गैर खतरनाक व्यवसाय में सशर्त काम कर सकते हैं। ये बच्चे जरूरत और हालात को देखते हुए स्कूल समय के बाद बाल कलाकार के रूप में काम कर सकते हैं। इसमें विज्ञापन, टेलीविजन, सीरियल और सर्कस आदि गतिविधियां शामिल हैं। उनसे अधिकतम 6 घंटे ही काम लिया जा सकता है। इसके बाद एक घंटे का विश्राम देना अनिवार्य है। ये महत्वपूर्ण जानकारी प्रमुख सचिव श्रम एवं सेवायोजन डॉ एमके शन्मुगा सुंदरम ने दी।
शुक्रवार को बापू भवन में उद्यमी संगठनों के साथ बाल श्रम उन्मूलन और पुनर्वासन कार्यक्रम की बैठक में प्रमुख सचिव श्रम ने बताया कि किशोरों व युवाओं से शाम 7 बजे से सुबह 8 बजे के बीच कोई काम नहीं लिया जा सकता। कोई ओवर टाइम नहीं कराया जा सकता। साप्ताहिक अवकाश देना होगा। जिन प्रतिष्ठानों में किशोरों से काम लिया जाएगा, उसकी सूचना क्षेत्रीय श्रम निरीक्षकों को देनी होगी।
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डॉ. सुंदरम ने बताया कि बाल श्रम अधिनियम के अंतर्गत 14 साल तक के बच्चों पर सभी प्रकार के काम में प्रतिबंध लगा दिया गया है। व्यापार संगठनों और उद्योग संघ के पदाधिकारियों के साथ श्रम विभाग ने एक आचार संहिता पर भी हस्ताक्षर किए। इसके तहत परिवारों की काउंसिलिंग, हाउस होल्ड सर्वे, होटल इंडस्ट्री व अन्य प्रतिष्ठानों में छात्र पार्ट टाइम काम करेंगे। श्रमायुक्त मार्कंडेय शाही ने बताया कि प्रदेश में कामकाजी बच्चों में लड़कियों की संख्या में वृद्धि हुई है जो चिंता का सबब है।