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अचानक ही अपनी सरकार के खिलाफ नहीं खड़े हो गए भाजपा विधायक, ये हैं असली कारण

Wed, 18 Dec 2019 03:28 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ गए थे भाजपाई (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala
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सरकार व संगठन के खिलाफ भाजपा विधायकों का मुखर होना कोई एकाएक नहीं है। यह संगठन की अंदरूनी राजनीति और विधायकों की अनदेखी से पनप रही नाराजगी थी, जो मौका पाते ही फूट पड़ी।

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लोनी से विधायक नंद किशोर गुर्जर के समर्थन में आए भाजपा के आधे से अधिक विधायकों ने लगे हाथ अपनी-अपनी पीड़ा का इजहार कर दिया। कई बार ऐसे मामले सामने आए जब विधायकों को ही गलत ठहराया गया, उनकी सुनवाई नहीं हुई। इसे लेकर विधायकों में असंतोष बढ़ता चला गया।

विधायकों का कहना था कि शिकायत लेकर संगठन के नेताओं के पास पहुंचने पर ऐसा व्यवहार किया जाता है, जैसे वे ही दोषी हों। जनता के बीच रहने के कारण उन्हें लोगों की बात रखनी पड़ती है, लेकिन अफसर इतने बेगलाम हैं कि सुनवाई नहीं करते।
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विधायक नंद किशोर गुर्जर ने इससे पहले भी राष्ट्रीय और प्रदेश नेतृत्व को समय-समय पर गाजियाबाद की घटनाओं से अवगत कराया था, लेकिन पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने भी विधायक की शिकायत को लगातार नजरअंदाज किया।

फ्लोर मैनेजमेंट रहा कमजोर

सरकार और संगठन का फ्लोर मैनेजमेंट कमजोर होना भी मंगलवार को हुई घटना की वजह बना। संगठन और सरकार की ओर से शीतकालीन सत्र से पहले विधानमंडल दल की बैठक नहीं हुई। मंगलवार को सदन में भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सहित कई वरिष्ठ मंत्री मौजूद नहीं थे। मुख्यमंत्री झारखंड में चुनाव प्रचार के लिए गए हुए थे।

भाजपा विधायकों के असंतोष को विपक्ष ने दी हवा
नंद किशोर गुर्जर के उत्पीड़न की आड़ लेकर भाजपा विधायकों में असंतोष की चिंगारी को विपक्षी दल हवा देते रहे। यही वजह है कि सपा सदस्य उनके समर्थन में वेल में ही नहीं आए, सदन का बहिर्गमन भी किया। विपक्षी, खासतौर से सपा विधायकों ने भाजपा विधायकों के साथ धरना भी दिया। वे शाम 6 बजे तक हाउस में ही डटे रहे।

साढ़े चार घंटे चला रुठने-मनाने का दौर

लोनी विधायक नंद किशोर गुर्जर को सदन में बोलने नहीं देने से उपजे विवाद के बाद विधायकों को रुठने और मनाने का दौर साढ़े चार घंटे तक चला। देर शाम सरकार और संगठन से मनमाफिक आश्वासन मिलने के बाद भाजपा विधायक सदन छोड़ने को तैयार हुए। दोपहर करीब 2.30 बजे उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा मामले की सूचना मिलने पर हरकत में आए।

उन्होंने परिवहन मंत्री अशोक कटारिया, भाजपा प्रदेश महामंत्री विजय बहादुर पाठक, पंचायतीराज मंत्री भूपेंद्र चौधरी को अपने कक्ष में बुलाया। दिनेश शर्मा और संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना विधायक नंद किशोर गुर्जर सहित कुछ विधायकों को लेकर विधानसभा अध्यक्ष के मीटिंग हॉल में गए, लेकिन एक मिनट बाद ही नंद किशोर सहित कुछ विधायक मीटिंग हॉल से बाहर निकल आए। बाद में उप मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों ने फिर लॉबी में पहुंचकर विधायकों को समझाने का प्रयास किया।

अफसरों को सदन में बुलाकर कार्रवाई का दिया गया आश्वासन

आखिरकार विधायकों को गाजियाबाद के एसएसपी, एसओ सहित अन्य अधिकारियों को सदन में बुलाकर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया गया, उसके बाद शाम 6 बजे विधायक सदन से बाहर आए। भाजपा विधायकों के समर्थन में कांग्रेस और सपा के विधायक सदन में जमे रहे जबकि बसपा के विधायक कुछ देर बाद सदन से चले गए।

नंद किशोर ने योगी व स्वतंत्र देव से बयां की पीड़ा, उत्पीड़न का आरोप
दिन भर हंगामे के बाद भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर ने रात में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह से मिलकर अपनी पीड़ा बयां की। मुख्यमंत्री के कालिदास मार्ग स्थित आवास पर हुई मुलाकात में नंद किशोर ने भाजपा के दो-तीन स्थानीय नेताओं व एक पुलिस अधिकारी पर साजिश का आरोप लगाया। कहा कि यदि उन्हें बोलने का मौका दे दिया गया होता मामला इतना नहीं बढ़ता।

मुख्यमंत्री आवास पर नंद किशोर के साथ गाजियाबाद जिले के दो और विधायक थे

डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा, संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना और गन्ना मंत्री सुरेश राणा के साथ मुख्यमंत्री आवास पर नंद किशोर के साथ गाजियाबाद जिले के दो और विधायक थे। नंद किशोर ने सरकार व भाजपा संगठन के मुखिया को 27 नवंबर को खाद्य सुरक्षा अधिकारी के साथ हुए पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी।

बताया कि एसपी देहात के कहने पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। पार्टी के जिलाध्यक्ष व चेयरमैन के पति पर भी साजिश में शामिल रहने का आरोप लगाया। कहा कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने उनसे अमर्यादित व्यवहार किया। खाद्य रसद विभाग के पूर्व मंत्री पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर उनकी बात नहीं सुनी गई। पार्टी व सरकार उनकी पीड़ा सुन सकती थी। जांच कराकर कार्रवाई कर सकती थी।
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सरकार व संगठन ने सुनी नहीं

गुर्जर ने कहा कि सरकार और संगठन ने उनकी बात सुनी नहीं और सदन में भी उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया गया। पुलिस ने उनके ऊपर झूठे व मनगढ़ंत आरोप लगाए हैं। उन्हीं को सही मान लिया गया है। जिस खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने रिपोर्ट दर्ज कराई है, उसकी शिकायत लोनी के तमाम व्यापारियों ने की है। उनका वीडियो भी वायरल हो चुका है। मुख्यमंत्री ने विधायक की बात को गंभीरता से सुना।

पूरे प्रकरण की जानकारी दी
इससे पहले संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना व सुरेश राणा ने मुख्यमंत्री को पूरे प्रकरण की जानकारी दी। बताया कि किस तरह इस मामले में विपक्षी दलों को राजनीति करने और सरकार की छवि खराब करने का मौका दिया गया। बताया कि विधायक की समस्या के समाधान का आश्वासन दिया गया था।
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