उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के लिए भी नहीं है। गरीबों को इलाज नहीं मिल रहा है। सैफई मेडिकल कॉलेज के लिए भले ही पैसा न देते लेकिन गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के लिए जरूर कुछ करना चाहिए था। वहां के मेडिकल स्टाफ को पीजीआई के बराबर सहूलियते मिलें, भत्ते मिले। सपा सरकार ने यह प्रयास शुरू कर दिया था। लोहिया और केजीएमयू के कर्मचारियों को पीजीआई के समान वेतन मिलने लगा था। तैयारी यह थी कि हर मेडिकल कॉलेज को यह सुविधा मिलने लगेगी। बजट में कोई नया मेडिकल कॉलेज बनाने का प्रविधान नहीं किया गया। जो बन भी रहे हैं, उनको पूरा करने के लिए भी बजट में कोई इंतजाम नहीं हैं।
लॉ एंड ऑडर को भी कुछ नहीं दिया
सबसे महत्वपूण सवाल लॉ एंड ऑडर का है। हमारी सरकार में इसे सुधारने के लिए जो भी काम चल रहा था वह भी आधा अधूरा पड़ा है। हमारी सरकार में जो पुलिस भवन बन रहा था वह भी अधूरा पड़ा है और सरकार इन्हें इस लिए पूरा नहीं कर रही है कि पिछली सरकार को इसका लाभ न मिल जाए। अगर हमारी सरकार होती तो न जाने कितनी इनोवा 100 नंबर के लिए आ जातीं। ताकि सिपाही मौके पर समय पर पहुंच जाते।
एक्सप्रेस वे के लिए पैसा नकाफी
सपा सरकार में जो काम चल रहे थे उन्हें धीमा करके अब बजट दिया जा रहा है। एक्सप्रेस वे के लिए जो पैसे दिए गए हैं उससे तो रास्ते की घास भी साफ नहीं होगी। केवल एक हजार कारोड़ में तो खेतों की मेढ़ भी नहीं हट पाएगी। ऐसे तो पूर्वांचल एक्सप्रेस वे बन चुका। सपा में इसकी जमीन लेने के लिए 70 प्रतिशत काम हो चुका था। वहीं इस सरकार को दो साल हो चुके हैं अभी तक घास तक नहीं हटा पाई है। गोरखपुर- बुंदेलखंड कब जुड़ेगा पता नहीं। जो पैसा कैंसर संस्थान के लिए दिया गया है उससे कुछ नहीं बनने वाला। सरकार ने जो 22 करोड़ पेड़ पौधे लगाने का फैसला लिया है उससे लिए प्रदेश में जमीन ही कहां है।