बीते 18 वर्षों में पहला मौका होगा जब सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। परिषद में अखिलेश का कार्यकाल 5 मई को समाप्त हो जाएगा। उन्होंने खुद की जगह प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम को विधान परिषद भेजा। दूसरी सीट पर गठबंधन धर्म निभाते हुए बसपा के भीमराव अंबेडकर को मौका दिया। अखिलेश ने 2000 में पहली बार कन्नौज से लोकसभा उप चुनाव से जीतकर सक्रिय राजनीति में कदम रखा। 2004 में कन्नौज और गाजियाबाद सीट से लोकसभा चुनाव लड़े। उन्होंने दोनों सीटों पर चुनाव जीता, फिर गाजियाबाद सीट छोड़ दी। 2009 में अखिलेश लगातार तीसरी बार कन्नौज से सांसद बने। 2012 में मुख्यमंत्री बनने के बाद सांसदी छोड़ दी। वह 5 मई 2012 को एमएलसी चुने गए।