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एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में विरोधी दलों पर बरसे CM

Mon, 21 Apr 2014 09:18 AM IST
अनिल श्रीवास्तव/ अमर उजाला, लखनऊ
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का कहना है कि भाजपा को डरती है इसलिए उसने वाराणसी में आरएसएस के छह लाख कार्यकर्ताओं का सहारा लिया है, लेकिन असली लड़ाई तो अब तीसरे चरण के मतदान के साथ ही शुरू हो रही है।
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बकौल अखिलेश सपा पहले दो चरणों में बढ़त ले चुकी है। आगे के सभी चरणों में पार्टी को बढ़त मिलेगी।

चुनाव में पार्टी की उम्मीदों से लेकर सरकार के कामकाज और विपक्षियों के हमले आदि को लेकर अमर उजाला के संवाददाता ने उनसे बातचीत की। देखें बातचीत के प्रमुख अंशः

सेकुलर होने का लाभ

सवाल- प्रदेश में दो दौर का चुनाव हो चुका है। क्या उम्मीदें देख रहे है?
पहले और दूसरे चरण में जहां  चुनाव हुए वह सपा का कमजोर इलाका है लेकिन खुशी है कि इसमें हमारे पक्ष में अच्छा मतदान हुआ। मै पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गया।

नेताजी गए सरकार की उपलब्धियों और सेकुलर सोच का फायदा हमें मिल रहा है। पहले दो चरणों में तो सपा का प्रदर्शन अच्छा रहेगा ही।

आगे के चरणों में और अच्छा रिस्पांस मिलेगा और हर चरण में सपा की सीटें बढ़ती जाएंगी। असली लड़ाई तो तीसरे चरण के बाद शुरू हो रही है। अंतिम चरण तक बढ़त लेते जाएंगे।

कानून व्यवस्‍था बेहतर है

सवाल- कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्ष आपकी सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहा है?
कानून-व्यवस्था बहुत संवेदनशील मुद्दा है। हम लगातार इस पर काम कर रहे हैं। जहां घटनाएं हुईं वहां प्रभावी कार्रवाई की। लापरवाह अफसरों को भी नहीं बख्शा।

पॉलिटकल प्रदेश है इसलिए विपक्ष यह मुद्दा उठाता रहता है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए 1090 शुरू की। कानपुर में अत्याधुनिक कंट्रोल रूम बनाया।

कानून-व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए लगातार काम करने की जरूरत है और हम तमाम कदम उठा भी रहे हैं।

मुस्लिम हमारे साथ

सवाल- चुनाव में मुजप्फरनगर दंगों का कितना नुकसान होने जा रहा है। कहा जा रहा है मुस्लिम नाराज है आपसे?
यह सही नहीं है। मुजफ्फरनगर दंगे पर हमने प्रभावी कार्रवाई की। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की और पीड़ितों को जितनी राहत दी जा सकती थी दी।

मुस्लिम बिलकुल नाराज नहीं हैं। हमारे साथ हैं। सच तो यह है कि पहले चरण की वोटिंग ने इस तरह के तमाम मुद्दों को खत्म ही कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय में हमने जवाब दिया।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी सरकार की कार्रवाई पर संतोष जताया।

यूपी सरकार नहीं गिरेगी

सवाल- भाजपा नेता आपकी सरकार पर हमलावर हैं। लोकसभा चुनाव के बाद आपकी सरकार के गिर जाने का दावा कर रहे हैं?

भाजपा के नेता पहले खुद तय कर लें कि हमारे कितने विधायक किसके संपर्क में हैं। कोई 150 को कोई 40 तो कोई कुछ और कह रहा है।

वह जमाना गया जब पार्टी को तोड़ा जा सकता था। अब तो कोई पार्टी छोड़ता है तो उसकी सदस्यता ही चली जाएगी। फिर बहुमत का फैसला स्पीकर सदन में करेगा।

किसी कह देने से सरकार नहीं गिरने वाली।

भाजपा में फूट के सवाल पर

सवाल- मुलायम सिंह जी ने कहा है कि नरेंद्र मोदी नहीं बल्कि भाजपा का कोई चालाक नेता पीएम बनना चाहता है। क्या सपा को भी भाजपा की बढ़त दिखाई दे रही है।

जहां तक चालाक नेता के पीएम बनने का सवाल है तो इसका जवाब नेताजी ही दे सकते हैं लेकिन मेरे हिसाब से प्रदेश में भाजपा को कोई बढ़त नहीं मिलने जा रही है। भाजपा अपने पक्ष में वेव की बात कर रही है। वेव कहीं दिखाई पड़ती है? सारी हवा उनके कैंपेन में है। जमीन पर कोई हवा नहीं है भाजपा की।

इसी से समझिये कि भाजपा के बड़े नेता वाराणसी और लखनऊ से चुनाव लड़ रहे हैं। तर्क दिया जा रहा है कि इससे आसपास की सीटों पर फर्क पड़ेगा।

लखनऊ और वाराणसी के आसपास भाजपा को कितनी सीटें मिलती हैं नतीजे आने के बाद देख लीजिएगा। यह भाजपा का डर ही तो है कि वाराणसी में आरएसएस ने छह लाख वर्कर चुनाव में लगाना पड़ा है।

केजरीवाल प्रभावी नहीं

सवाल- चुनाव में केजरीवाल का कितना ‘इफेक्ट’ देख रहे हैं?
कोई इफेक्ट नहीं है। अब आम आदमी पार्टी की हवा निकल गई है।

सपा ही रोकेगी भाजपा को
सवाल- भाजपा का दावा है कि प्रदेश में उसका मुकाबला बसपा से है। सपा कहीं रेस में भी नहीं है?
ये वो लोग हैं जिनके ‘मुंह में राम बगल में छुरी’ है। टेढ़े चलते हैं।

कौन नहीं जानता कि बसपा ने अपना वोट भाजपा को ट्रांसफर किया। इन्हें टक्कर तो सपा ही दे सकती है और दे भी रही है।

सवाल- नरेंद्र मोदी कह रहे हैं कि नेता जी को जहां कठोर होना चाहिए वहां मुलायम और जहां मुलायम होना चाहिए वहां कठोर हो जाते हैं। आपका का क्या मानना है?
उनके इस बयान पर मै कोई टिप्पणी नहीं करूंगा।
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आयोग के पैमाने अलग

सवाल-क्या आजम खां का अड़ियल रवैया चुनाव आयोग के मामले में बाधक नहीं बना?
बात अड़ियल रवैये की नहीं है। हम आयोग पर उंगली नहीं उठा रहे है लेकिन पार्टियों पर निगरानी रखने की जिम्मेदारी आयोग की है।

खुलेआम मंचो पर धर्म का इस्तेमाल किया गया। क्या कहा आयोग ने? भाजपा धार्मिक सांप्रदायिकता के  सहारे चुनाव जीतना चाहती है।

कोई संस्था तो इसे रोकेगी। दो पैमाने तो हो नहीं सकते। आजम साहब के साथ भी न्याय होना चाहिए।
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