फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Lucknow News: अवैध बताकर किए गए थे सील बिना बदलाव के खुल भी गए

विज्ञापन
अलीगंज इलाके में वो निर्माण जहां एलडीए की मेहरबानी से चल रहे प्रतिष्ठान।  - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
केस-1
विज्ञापन

अलीगंज में केंद्रीय भवन के पास एक मकान को तोड़कर कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स बना दिया गया। करीब एक वर्ष पहले एलडीए ने इस बिल्डिंग को अवैध बताते हुए सील किया था। कुछ महीने बाद बिना किसी बदलाव के सील खुल भी गया। अब तीन मंजिला इस बिल्डिंग के बेसमेंट में रेस्टोरेंट चल रहा है। पार्किंग भी नहीं है। गाड़ियां खड़ी होने से फुटपाथ और नाले पर कब्जा रहता है। एलडीए के अफसरों ने इस ओर आंखें बंद कर रखी हैं।
केस-2
अलीगंज में केंद्रीय भवन के सामने से जाने वाली मुख्य सड़क के कॉर्नर पर एक मकान को तोड़कर कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाया गया है। करीब दो साल पहले एलडीए ने इसे अवैध बताते हुए सील किया था। यहां भी कुछ भी नहीं बदल और बिल्डिंग में कई तरह के कारोबार चल रहे हैं। यहां भी पार्किंग भी नहीं है। फुटपाथ पर कब्जा है और छत पर ओपन रेस्टोरेंट चलाया जा रहा है।
विज्ञापन

केस-3
अलीगंज में एनीमेशन कोचिंग वाली बिल्डिंग से करीब आधा किमी की दूरी पर सेक्टर-के स्थित एक मकान को तोड़कर कॉम्प्लेक्स बनाया गया है। यहां पर भी पार्किंग नहीं और जो बेसमेंट है उसमें में रेस्टोरेंट खोल दिया गया है। ऐसे में गाड़ियां आधी सड़क तक खड़ी होती हैं। बिना पार्किंग बेसमेंट में रेस्टोरेंट कैसे खुल गया, यह बड़ा सवाल है।

लखनऊ। अलीगंज इलाके में जिस बिल्डिंग में आग से 15 लोगों की जान गई, उसके आसपास कई ऐसी इमारतें हैं जिन्हें एलडीए ने अवैध करार देते हुए सील किया था। हालांकि, कुछ समय बाद सील हट गई। वर्तमान समय में इन इमारतों में होटल, बैंक, जिम, रेस्टोरेंट चल रहे हैं।

खास यह है कि इन बिल्डिंगों का निर्माण एलडीए से स्वीकृत मानचित्र के विपरीत किया गया था, जिसकी वजह से इन्हें सील किया गया। इसके बावजूद बिना पार्किंग, सेट बैक जैसे जरूरी मानक पूरे किए हुए इनका सील खुल भी गया। पूर्व में अवैध घोषित होने के बाद इन भवनों में अग्नि सुरक्षा मानकों की पड़ताल हुई या नहीं, बिजली का व्यावसायिक कनेक्शन किस आधार पर मिला, ये सवाल भी अनुत्तरित हैं। ऐसे में चर्चा शुरू हो गई है कि अलीगंज अग्निकांड में 15 लोगों के जान जाने के बाद एलडीए की ओर से शहर में चलाया जा रहा सीलिंग अभियान कहीं दिखावा बनकर न रह जाए।


अलीगंज की सेक्टर-डी की जिस बिल्डिंग में आग लगने से 15 लोगों की जान गईं, उसकी प्रारंभिक जांच में यह सामने आ चुका है कि बिल्डिंग पूरी तरह अवैध थी। बिल्डिंग का निर्माण भी मानकों के विपरीत किया गया था। उसमें आग से बचाव के लिए कोई उपाय नहीं किए गए थे। मानकों के अनुसार सेट बैक भी नहीं छोड़ा गया था।

दबे पड़े हैं ध्वस्तीकरण के छह हजार आदेश
एलडीए के रिकॉर्ड के अनुसार, अलीगंज सेक्टर-डी में भूखंड संख्या एमएस-102 पर बनी जिस बिल्डिंग में हादसा हुआ, वहां एलडीए ने मकान बनाकर 1980 में आवंटन किया था। जिसे बाद में खरीदने वाले ने तोड़ दिया और नए सिरे से मकान बनाने के नाम पर साल 2014 में आवासीय मानचित्र कराया मगर यहां पर कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स खड़ा कर दिया। एलडीए ने इस बदलाव के बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी कर 2016 में ध्वस्तीकरण आदेश जारी किया। हालांकि, इस अवैध निर्माण को तोड़ने के बजाय मिलीभगत से ध्वस्तीकरण के आदेश को दो महीने बाद निरस्त कर दिया गया। कुछ ऐसा ही हाल इसके बाद हुए अवैध निर्माणों के मामले में चल रहा है। यही वजह है कि इस समय करीब छह हजार ध्वस्तीकरण के आदेश एलडीए दफ्तर में फाइलों में दबे हैं। इतना ही नहीं, सिर्फ नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई कर मामले को पूरी तरह से दबाने के मामलों की संख्या भी करीब 30 हजार के पार है।


इंजीनियर ऐसे कराते हैं अवैध निर्माण
एलडीए से जुड़े सूत्रों ने बताया कि अवैध निर्माण इंजीनियरों की मिलीभगत से ही होता है। वह पहले अवैध निर्माण को रोकने के लिए नोटिस जारी करते हैं मगर निर्माण को सील नहीं करते। इसके बाद महीनों तक निर्माण चलता रहता है। जब निर्माण पूरा हो जाता है और फिनिशिंग का काम बचता है तब उसे सील किया जाता था, जिससे फाइलों में कार्रवाई दर्ज हो जाए। कुछ महीने बाद अचानक सील खुल जाता है। इसके लिए भवन स्वामी से मात्र शपथपत्र लिया जाता है कि वह भवन निर्माण से जुड़े सभी मानकों का पालन करेगा। हालांकि, ऐसा होता नहीं है। यही वजह है कि अवैध निर्माण के मामलों में इंजीनियरों पर कार्रवाई की रिपोर्ट तो शासन को जाती है मगर असल में वह अपने कुर्सी पर बने रहते हैं।
विज्ञापन


एलडीए वीसी ने दिया सरकारी बयान
इस संबंध में जब एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार से बात की गई तो उन्होंने सरकारी बयान ही दिया। कहा कि जिन बिल्डिंगों का निर्माण अवैध है और वहां पर मानक विपरीत व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है और लोगों की सुरक्षा को खतरा है, उनको सील करने की कार्रवाई की जा रही है। इसके लिए अभियान चलाया जा रहा है। यदि कहीं पर इंजीनियरों ने अनदेखी की है तो उन पर भी कार्रवाई होगी।

अलीगंज इलाके में वो निर्माण जहां एलडीए की मेहरबानी से चल रहे प्रतिष्ठान। - फोटो : अमर उजाला

अलीगंज इलाके में वो निर्माण जहां एलडीए की मेहरबानी से चल रहे प्रतिष्ठान। - फोटो : अमर उजाला

अलीगंज इलाके में वो निर्माण जहां एलडीए की मेहरबानी से चल रहे प्रतिष्ठान। - फोटो : अमर उजाला

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें