खबर है कि डौंडिया खेड़ा में सोने की कोई उम्मीद नहीं रह गई है। यहां खुदाई का खेल कभी भी खत्म हो सकता है।
एचटी की की एक खबर के मुताबिक, राजा राव राम बख्श सिंह के किले में पुरात्वविदों को दूसरी परत की खुदाई में भी सामान्य मिट्टी ही मिली है और इसके साथ ही मेटल की उम्मीद भी खत्म हो गई है।
डौंडिया खेड़ा में काम रही टीम ने भी दबी जुबां में ये बात मान ली है कि आगे खुदाई करने का कोई खास मतलब नहीं बचा है।
आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, लखनऊ सर्किल की टीम ने इस बाबत एक रिपोर्ट भी केंद्र को भेज दी है। अब फाइनल पैक अप के लिए केंद्र से अधिकारियों का इंतजार हो रहा है।
डौंडिया खेड़ा में खुदाई की देखरेख कर रहे एएसआई के एक अधिकारी ने बताया कि बुधवार को वहां खुदाई में कुछ भी खास हाथ नहीं लगा।
उन्होंने ही बताया कि खुदाई में जैसे ही सामान्य मिट्टी मिलती है, उसके आगे खुदाई करने का कोई मतलब नहीं रह जाता। इस बात की जानकारी हेड क्वार्टर को भी दे दी गई है। अब आखिरी फैसला उन्हें लेना है।
18 अक्तूबर से शुरू होकर 13 नवंबर तक की दूसरे चरण की खुदाई 5.93 मीटर तक की जा चुकी थी। यह बात अलग है कि महज एक स्वप्न से शुरू हुई इस पूरी कसरत में कुछ भी ठोस हाथ नहीं लगा।
आधिकारी काट रहे कन्नी
हालांकि, बदनमी के डर से कोई अधिकारी इस बारे में आधिकारिक बयान नहीं दे रहा है। एसआई लखनऊ सर्किल के अधीक्षण पुरातत्वविद पीके मिश्रा से अमर उजाला ने बात की, तो उन्होंने यह कहकर बात टालने की कोशिश की कि मोहर्रम और कार्तिक पूर्णिमा पर दो दिन के लिए ही खुदाई बंद रहेगी।
उन्होंने बताया कि 18 तारीख के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। दिल्ली से भी अब तक एक भी आधिकारिक वर्जन इस मामले पर नहीं दिया गया है।