लखनऊ। जिले में करीब सात हजार से अधिक ऐसे उपभोक्ता हैं, जिन्हें चार पहिया वाहन का मालिक या आयकरदाता बताते हुए पूर्ति विभाग ने अघोषित रूप से उन्हें मिलता आ रहा मुफ्त खाद्यान्न फिलहाल रोक दिया है। खास बात यह है कि इस सूची में कुछ नाम ऐसे भी शामिल हैं, जिनके पास चौपहिया वाहन खड़ी करने तक की जगह नहीं है। ऐसे उपभोक्ताओं को इस आशय का शपथपत्र देने के बाद ही अब राशन मिल सकेगा कि वह चार पहिया वाहन के स्वामी अथवा आयकरदाता नहीं है।
केस-01
डालीबाग उचौवा निवासी असरगरी बेगम व उनका परिवार मेहनत मजदूरी कर जीविका चलाते हैं। पात्र गृहस्थी का राशनकार्ड उनके पास है। वह अपना खाद्यान्न लेने सुबह आठ बजे राशन की दुकान पर गईं। दो बजे के बाद जब नंबर आया तो कोटेदार ने बताया कि आयकर विभाग की ओर से उपलब्ध कराई गई सूची में उनके पुत्र दानिश के नाम चार पहिया वाहन दर्शाया गया है। इसलिए राशन नहीं मिलेगा। अगर ऐसा नहीं है तो इसका उन्हें शपथपत्र विभाग को देना होगा। उसके बाद ही खाद्यान्न मिल सकेगा। यह सुनते ही असगरी बेगम का पारा चढ़ गया। बताया कि मेहनत मजदूरी कर दो जून की रोटी उसके परिवार को नसीब होती है। उसका घर तक ऐसा नहीं है कि चार पहिया वाहन खड़ा हो सके। दानिश भी अभी पढ़ाई कर रहा है। अब उसे कचहरी शपथपत्र बनवाने और डीएसओ कार्यालय जमा करने जाने को कहा जा रहा है।
केस-02
खुर्रमनगर निवासी सोनी सरोज पत्नी अनुपम कुमार सिंह भी जब कोटेदार रेहाना खातून की उचितदर की दुकान पर राशन लेने गईं तो उन्हें बताया गया कि उनका नाम चार पहिया वाहन धारक की सूची में शामिल है। सोनी ने कोटेदार को बताया कि उसके पास न तो चार पहिया वाहन है और न ही वह आयकरदाता है। मजबूर होकर सोनी सरोज ने कचहरी पहुंचकर शपथ पत्र बनवाया और कोटेदार को दिया। इसमें उन्होंने बताया कि उसकी वार्षिक आय एक लाख रुपये है। तब जाकर कोटेदार ने उसे खाद्यान्न उपलब्ध कराया। कमोवेश कुछ ऐसी ही स्थिति बीकेटी इसके अलावा ग्राम शिवनी निवासी रामलखन यादव, रामकुमारी की है। दोनों ने कोटेदार को बताया कि वह लोग न तो आयकरदाता हैं और न ही उनके पास चौपहिया वाहन है।
Iखाद्यान्न वितरण के दौरान मेरे पास भी करीब आधा दर्जन लोग ऐसे आए, जिन्होंने बताया कि उनके पास चौपहिया वाहन नहीं है। वह खाद्यान्न देने की जिद कर रहे थे, लेकिन आयकरदाता की सूची में नाम होने के कारण उनका राशन होल्ड कर दिया है। उनसे डीएसओ कार्यालय जाकर सबूत देकर अनुमति लाने को कहा है। I
I
- रविकांत सिंह, कोटेदार विकास नगरI
Iप्रदेश भर में आयकर विभाग की ओर से उपलब्ध कराई गई सूची को कोटेदारों को भेजा गया है। जब कार्ड बने होंगे, तब भी विभागीय अधिकारियों ने ही जांच कर उसे बनाया होगा। जो वास्तव में आयकरदाता हैं, उनके नाम हटने चाहिए, लेकिन जो नहीं हैं उनकी जांच कर विभाग को इसका पटाक्षेप करना चाहिए।I
I- अशोक कुमार, प्रदेश महासचिव, ऑल इंडिया फेयर प्राइस शॉप डीलर एसोसिएशनI
Iआयकरदाता राशनकार्ड के लिए पात्र नहीं हैं। अगर किसी को लगता है कि उसका नाम आयकरदाता सूची में गलत ढंग से आ गया है तो वह उसका प्रमाण अथवा शपथपत्र उपलब्ध करा दें। जांच करा ली जाएगी। उपभोक्ता की बात सही पाए जाने पर उसका नाम राशनकार्ड से नहीं काटा जाएगा। I
I- विजय प्रताप सिंह, जिलापूर्ति अधिकारीI
राशन लेते कार्ड धारक।