लखनऊ के अपराधों के ग्राफ में वाहन चोरी का ग्राफ सबसे ऊपर है। पुलिस ने न तो वाहन चोरी रोकने के ठोस प्रयास किए और न ही वाहन चोरी की तफ्तीश में संजीदा है। चोरी हुए वाहन की तलाश के बजाय तफ्तीश की खानापूरी कर फाइनल रिपोर्ट लगाने का खेल चल रहा है।
तभी तो अपने ही थाने में खड़ी चोरी की गाड़ी तफ्तीश कर रहे दरोगा को नजर नहीं आई। एसएसपी की सख्ती पर थानों से चोरी के 47 वाहन बरामद कर चुकी पुलिस ने अब चोरी की पांच सौ गाड़ियों के मालिकों की तलाश शुरू की है।
गुडंबा के आदिलनगर निवासी काजी अरशद हुसैन की बाइक दिसंबर 2012 में चोरी हुई। बड़ी मुश्किल से पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की और बाइक की तलाश के बजाय तफ्तीश की खानापूरी कर फाइनल रिपोर्ट लगा दी। चार साल बाद खुलासा हुआ कि अरशद हुसैन की बाइक 4 जनवरी 13 से गुडंबा थाने में ही खड़ी थी।
थाने के रिकॉर्ड में यह बाइक लावारिस के रूप में दर्ज है। सवाल उठे कि विवेचक को अपने ही थाने में खड़ी चोरी की बाइक क्यों नजर नहीं आई? किस पुलिसकर्मी ने इलाके में लावारिस मिली बाइक थाने पहुंचाई और उसके मालिक की तलाश के क्या प्रयास किए?