लखनऊ। वेदना उर्मिला की पढ़ी न गई, विवशताएं लखन की कही न गईं...। ये पंक्तियां हैं कानपुर की साहित्यकार डॉ. कुसुम सिंह ‘अविचल’ की आठवीं पुस्तक अंतर्नाद से जिसका विमोचन उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान में रविवार को किया गया। साहित्यकारों ने उनकी कृति पर विचार व्यक्त किए और काव्यपाठ भी हुआ। साहित्यकारों को सम्मानित भी किया गया।
श्री सत्य संदेश संस्था की ओर से आयोजित समारोह की शुरुआत वरिष्ठ कवयित्री शोभा दीक्षित ‘भावना’ की वाणी वंदना से हुई। आचार्य ओम नीरव की अध्यक्षता में हुए समारोह में पद्मश्री विद्या विंदु सिंह, डॉ. रत्नेश्वर सिंह, डॉ. शिवमंगल सिंह मंगल, डॉ. अमरेंद्र वर्मा, विश्वंभर शुक्ल, नरेंद्र भूषण समेत अन्य साहित्यकारों की मौजूदगी में पुस्तक का विमोचन हुआ।
अंतर्नाद काव्य संग्रह की लेखिका डॉ. कुसुम सिंह ने बताया कि संकलन में कुल 93 रचनाएं हैं। दीप चंद्र गुप्ता ने संचालन किया। इस मौके पर कवि महेश अस्थाना, महेश गुप्ता, राजीव कुमार वत्सल, ऋषि श्रीवास्तव, कुंवर आनंद श्रीवास्तव और वैभव आदि मौजूद रहे।