बख्शी का तालाब। लासा और इकड़रिया की तरफ गोमती नदी का जलस्तर काफी कम होने से अब ग्रामीण पैदल और निजी वाहनों से आवागमन कर रहे हैं। वहीं, सुल्तानपुर और बहादुरपुर गांव की ओर पहले जहां नावों से आवाजाही हो रही थी, अब पानी कम होने पर नाव संचालन में दिक्कतें बढ़ गई हैं। नाविकों का कहना है कि खेतों में बनी मेड़ पर नाव फंस रही है। उन्होंने प्रशासन से कम पानी में नाव संचालन बंद करने की मांग की है। तहसीलदार शरद सिंह ने बताया कि शुक्रवार तक नावों का संचालन कराया गया है। शनिवार को हालात का आकलन करने के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा।
कई गांवों का रास्ता खुला
इटौंजा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों में भी गोमती का जलस्तर घटने से हालात सुधरने लगे हैं। लासा, इकड़रिया कला-खुर्द और हीरापुरवा का रास्ता पूरी तरह से खुल गया है। सुल्तानपुर और बहादुरपुर में भी पानी का स्तर कम होने से ग्रामीण पैदल चलने लगे हैं।
नायब तहसीलदार आकाश पांडेय ने बताया कि पानी उतरने के साथ प्रशासन, राजस्व और स्वास्थ्य विभाग की टीमें और अधिक अलर्ट मोड पर हैं।
किसानों से जुटाए जा रहे आंकड़े
बहादुरपुर, सुलतानपुर, इकड़रिया कला-खुर्द, हीरापुरवा, हरदा, दुघरा और जमखनवा समेत आंशिक रूप से प्रभावित कठवारा व मल्लाहन खेड़ा गांवों में डूबी फसलों का सर्वे कराया जा रहा है। वहीं, घर गिरने और मवेशियों की मौत से जुड़ी रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड कर दी गई है, ताकि प्रभावितों को समय पर राहत पहुंचाई जा सके।
स्वास्थ्य टीम पहुंची गांव-गांव
बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लेते हुए बीकेटी सीएचसी अधीक्षक डॉ. जेपी सिंह ने बताया कि डॉ. शब्बन अली के नेतृत्व में लगाए गए कैंपों में अब तक 704 मरीजों की जांच की गई है। इनमें 169 बुखार, 88 त्वचा रोग और 447 अन्य बीमारियों के मरीज शामिल रहे। इकड़रिया कला, दुधारा, सुल्तानपुर, बहादुरपुर और लासा गांवों में स्वास्थ्य कैंप लगाए गए हैं। ग्रामीणों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए क्लोरीन टैबलेट के इस्तेमाल की लगातार सलाह दी जा रही है।
बाढ़ का घटा पानी। दवा बांटती स्वास्थ्य विभाग की टीम।
बाढ़ का घटा पानी। दवा बांटती स्वास्थ्य विभाग की टीम।